Pages

Please Donate

PLEASE DONATE,CLICK ON THE BUTTON (BUY A GIFT VOUCHAR)

Follow by Email

check it -

Sunday, 21 December 2014

Review of Film PK (in Hindi)


Review of PK Film. तो पहले बात करते है फिल्म देखने से पहले उससे जुड़ी एक्सपेक्टेशन की, जब फिल्म देखने जा रहा था तो बहुत ही ज़्यादा एक्सपेक्टेशन्स थी. अमूमन में फिल्म थियेटर्स मे देखने नही जाता क्यूकी आज कल हिन्दी फ़िल्मे उस लेवल की बनती ही नही की 400-500 रुपय खर्च करके उसे थियेटर मे देखा जाए बस कुछ ही फिल्मकार ऐसे है जिनकी मूवी आप अपने दिमाक को साथ मे रखकर देख सकते है ओर उसे थियेटर्स मे देखके रोमांचित हो सकते है. आमिर ख़ान ओर राजकुमार हिरानी उनमे से है जिनकी फ़िल्मे देखने के लिए आप पैसा खर्च कर सकते है क्यूकी उनकी फ़िल्मो मे वो क्वालिटी, वो लेवल होता है की आप पूरी तरह से मनोरन्जीत हो सके. उनकी फ़िल्मो मे लॉजिक होता है, अपनी बात को समझाने का एक अलग तरीका होता है की बात दर्शको के दिमाक मे सीधे घुस जाए. बस फिल्म देखने जा रहा था तो इस बात की चिंता थी की फिल्म Sci-fi genre पे आधारित है तो विदाउट मच स्पेशल-एफेक्ट्स वो बिग बज़ट फिल्म कैसे बेहतर बना सकते है. लेकिन जब मैने फिल्म को देखा तो मेरी ये चिंता पूरी तरीके से ग़लत साबित हुई. फिल्म मे आमिर का एलीयन का किरदार बहुत जबरदस्त तरीके से फिल्माया गया है ओर एक तरीके से उन्होने अच्छा ही किया की फिल्म मे ज़्यादा स्पेशल-एफेक्ट्स नही डाले, नही तो ये संभावना थी की फिल्म को ज़्यादा Sci-fi बनाने के चक्कर मे एलीयन का करेक्टर भटक जाता जैसा फिल्म के दूसरे भाग मे इसकी कहानी के साथ हुआ की दूसरे भाग मे फिल्म की कहानी ही भटक गयी लेकिन फिर भी ये कहना चाहूँगा की फिल्म का पहला भाग इतना जबरदस्त बनाया गया है की दूसरा भाग चाहे बेहतरीन नही हो, फिर भी फिल्म के पहले भाग को देखके ही फिल्म के पैसे वसूल हो जाते है. इस फिल्म के मैं दो रिव्यू देना चाहूँगा एक कहानी के पहले भाग के बारे मे ओर दूसरा कहानी के दूसरे भाग के बारे मे. तो बात करते है कहानी के पहले भाग की-
1. पहला भाग इतना जबरदस्त है की शायद इससे बेहतर ओर कोई हिन्दी फिल्ममेकर बना ही नही सकता था. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर एक्टिंग तक हर जगह पूरी टीम का हार्ड वर्क दिखता है. फिल्म मे जो कोइंसिडेंट्स बनाए गये है वो जबरदस्त है, कैसे हिंदू महिला के लिए सफेद वस्त्र का मतलब पती की मौत से है लेकिन वही क्रिस्चियन के लिए ये शादी की पोशाक है, गाँधीजी की वॅल्यू लोग सिर्फ़ पैसो के नोट पे ही करते है, सेल्फ़ डिफेन्स आइडिया ओर ऐसे बहुत सारे रिलिजन ओर आम लोगो की विचित्र सोच पे सीन्स फिल्माए गये है जो लाजवाब है. जो एलीयन का इस दुनिया मे आके इस दुनिया को धीरे-धीरे जानने का पार्ट बनाया गया है(आमिर ये फ्लॅश बॅक अनुष्का को सुना रहा है) ये भाग इस फिल्म का सबसे मजबूत ओर बहुत ही मज़ेदार भाग है. इस भाग मे सिचुयेशनल कॉमेडी ऐसे बनाई गयी है की सामने वाले को देखते ही हॅसना जाए. दूसरी बेकार फ़िल्मो ओर इस फिल्म मे ये ही बड़ा डिफरेन्स है की दूसरी फ़िल्मो मे लोगो को ज़बरदस्ती हसाने का प्रयास किया जाता है लेकिन इस फिल्म मे ऐसा बिल्कुल भी नही है. सिचुयेशन्स ही ऐसी पैदा की गयी है की हसना आए ओर इस तरीके की कॉमेडी बनाना शायद बहुत-बहुत मुश्किल काम है. इसकी कॉमेडी को देख कर मुझे पहली हेरा-फेरी फिल्म की याद गयी, उस फिल्म मे भी सिचुयेशनल कॉमेडी पैदा की गयी थी ओर परेश रावल की एक्टिंग जबरदस्त थी, इस फिल्म मे भी सिचुयेशन ऐसी ही जबरदस्त बनाई गयी है की लोगो को सिचुयेशन देखके ही हसना जाए ओर आमिर ख़ान की एक्टिंग भी लाजवाब है. पहले भाग की जो पटकथा लिखी गयी है वो उम्दा है ओर इस पे बहुत मेहनत की गयी है, आमिर ख़ान की एक्टिंग लाजवाब है. राजू हिरानी का डाइरेकशन भी अच्छा है. बस कही-कही सॉंग के आस-पास फिल्म थोड़ी आर्टिफिशियल ड्रामा दिखने लगती है. फिल्म के पहले भाग का कॉन्सेप्ट भी अच्छा है की एक ऐसा इंसान जो दूसरी दुनिया से आया है उसे यहा लोगो का सोचने का तरीका कैसे अजीब लगता है ओर ये भी खूबसूरती से दिखाया गया है की उसे अजीब लगता है जब हम एक दूसरे को बोलकर अपनी भावनाए व्यक्त करते है ओर वो भी झूठी जबकि इनकी दुनिया मे लोग बात ही नही करते, झूठ बोलना तो दूर की बात है ये एक दूसरे से बात करके नही बस हाथ पकड़ के बात समझते है. ओवरऑल फिल्म का पहला भाग जबरदस्त है, लॉजिक का अच्छा इस्तेमाल किया गया है, फिल्म बिना रुके चलती रहती है ओर जबरदस्त मनोरंजन करती रहती है.
2. अब आते है कहानी के दूसरे भाग पर तो इस फिल्म के दूसरे भाग को देख कर बिल्कुल नही लगता की इसके दूसरे भाग की कहानी उसने ही लिखी है जिसने पहले भाग को लिखा है. फिल्म लॉजिक को किनारे करने लगती है, फिल्म लंबी खिचने लगती है ओर पूरी तरह से भटक जाती है. शायद कुछ ज़्यादा मेसेज देने के चक्कर मे कहानी की पूरी खिचड़ी बन गयी है. वो शुरू कहा हुई थी ओर कौनसी दिशा ले ली. फिल्म का दूसरा भाग देख कर बहुत अफ़सोस होता है,शायद दूसरे भाग तक पहुचते-पहुचते उनको इस फिल्म को बनाने का क्रेज़ कम हो गया होआमिर ख़ान की एक्टिंग के अलावा दूसरे भाग मे ऐसा कुछ ओर बेहतर देखने को नही है. टीवी एंकर रिपोर्टिंग, बाबा से बहस, बॉम्ब ब्लास्ट ओर कई ऐसे सीन्स बहुत ही बचकाने है, जो कहानी को कोई नयी दिशा नही देते. यकीन नही होता की ये दूसरा पार्ट राजू हिरानी ओर आमिर ख़ान ने ही बनाया है जो अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है,वैसे कुछ सीन्स ओर थोड़े लॉजिकल एग्ज़ांप्ल अच्छे है पर उस लेवल के नही है जैसे सीन्स फर्स्ट पार्ट मे है. शायद आमिर ख़ान को सुपर इंटेलिजेंट दिखाने के चक्कर मे स्टोरी पटरी से उतर गयी. कहानी को अगर कोई ओर दिलचस्प नयी दिशा मे मोड़ा जाता तो बेहतर होता. लेकिन फिर भी मैं इस फिल्म के पहले भाग से ही इतना इंप्रेस्ड हूँ ओर इतना एंटरटेनमेंट हुआ है की अगर फिल्म का दूसरा भाग बेकार था तो भी उससे कुछ ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा ओर मेरे पैसे वसूल हो गये, बट आमिर ओर राज कुमार हिरानी को आगे ध्यान रखना चाहिए ओर ओवरकॉन्फिडेन्स से बचना चाहिए. आप अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है जो नाच गाने ओर उछल कूद की बजाए फिल्म की कहानी पे फोकस करते है ओर दूसरे पार्ट मे फिल्म जिस तरह से बिखरी है वो बहुत ज़्यादा निराश करती है. Hope they will not repeat their mistakes again and will see both(aamir and rajkumar hirani) super hit jodi once again soon with brilliant different concept. Thanx :)