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Friday, 29 April 2016

भारतीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी जरा यात्रियों का भी ध्यान रखिये. Respected Indian Rail Minsiter Mr. Suresh Prabhu ji, Please take care railway passengers also

आदरणीय सुरेश प्रभु जी , आपकी irctc रेल सेवा की ये कैसी सेवा की आप किसी भी आम इंसान की user id ब्लॉक कर देते हो फिर वो धक्के खाता रहे इधर उधर पर उसे कोई जवाब नहीं मिलता। आप अपने प्रचार की जगह irctc की सर्विस सुधारिये ताकि आम लोगो को परेशानी नहीं हो. ये अच्छा है की आप दलालों और काला बाज़ारी पे नकेल कश रहे हो पर आप साथ में ये भी ध्यान रखे की आम लोगो को बिना तकलीफ दिए आप काम करे. पूरी बात बताता हु क्या है, मैं वैसे ज्यादा सफर तो नहीं करता पर जब सफर करना हो तो बड़ी लाइन में लगने की बजाय irctc से घर बैठे इ-टिकट लेना बेहतर समझता हु. बात कुछ साल पहले की है मुझे कही सफर करना था तो मैंने टिकट बुक करवाने के लिए irctc पे id बनाई और टिकट बुक करवाई. मैं ज्यादा सफर नहीं करता तो मुझे वो id भी याद नहीं रही कुछ दिन बाद मुझे वापस यात्रा करनी थी तो में irctc की वेबसाइट पे गया और login के लिए id डाला तो मैसेज आया की आपकी id deactivated है मुझे लगा की शायद बहुत दिनों से मैंने id को यूज़ नहीं किया होगा इसलिए ये id डीएक्टिवेट हो गयी मैंने फॉरगेट पासवर्ड पे क्लिक करके इनफार्मेशन लेनी चाही तो वहां भी इनफार्मेशन नहीं मिली की आपका अकाउंट डीएक्टिवेट है मुझे लगा की मेरा अकाउंट डिलीट हो गया होगा और मुझे फिर से एक अकाउंट बनाना होगा जब मैंने वापस नया अकाउंट बनाने के लिए इनफार्मेशन मेरी ईमेल id और फ़ोन no डाले तो irctc की वेबसाइट बता रही थी की आपकी id और फ़ोन no. आलरेडी रजिस्टर्ड है but अकाउंट डीएक्टिवेट है, पहले तो में पूरा कंफ्यूज हो गया की ये क्या मैटर है? जब मेरी ईमेल id और मेरा फ़ोन नो. verified किया हुआ था तो इन्होने मेरी यूजर id क्यों de-activate की, मैंने फ़ोन लगाया और ईमेल किया पर कुछ जवाब ही नहीं आया मुझे जल्दी में टिकट निकालना था तो मैंने अपनी पत्नी के मोबाइल no. और उनकी ईमेल id एंटर करके नयी irctc यूजर id बनाई. वहां तक तो ठीक लेकिन कुछ दिन बाद जब मुझे वापस सफर के लिए टिकट निकालना है तो मैं मेल id ओपन कर रहा हु तो वो ओपन ही नहीं हो रही और इसे भी de-activate कर दिया गया है. मुझे कुछ समझ नहीं आया की ये क्या हो रहा है. मैं Irctc द्वारा दिए हुए no. पे फ़ोन लगाता हु तो फ़ोन ही नहीं लगता और एक बार फ़ोन लग भी गया तो उसने मुझसे फ़ोन ८ मिनट तक फ़ोन होल्ड करके रखा अंत मैं मुझे ही फ़ोन काटना पड़ा,लगभग ३०-४० रूपए इधर उधर फ़ोन लगाके खर्च हो गए और ईमेल किया तो कोई रिप्लाई ही नहीं आ रहा. अब आप बताइए अगर मुझे टिकट निकालना है तो मैं कहा से टिकट निकालू? आपने मेरी id तो बंद करा रखी है, मैंने जब गूगल पे भी सर्च करने की कोशिश की तो पता लगा की Irctc की वेबसाइट पे ऐसे ही काम होता है एक बार आपकी id को इन्होने डीएक्टिवेट कर दिया तो ये कभी एक्टिवेट नहीं हो पाती चाहे आप कितना भी कोशिश कीजिये, अभी मेरी तकलीफ ये है की ना तो मेरे पास दूसरा मोबाइल है या मेल id है जिससे मैं एक और यूजर id बना सकु और मान लीजिए अगर कही से जुगाड़ करके बना भी ली तो वापस आप कुछ दिन में वो id बंद कर दोगे और मुझे वापस परेशानी उठानी पड़ेगी, क्या मेरा यही काम है की में Irctc से टिकट खरीदने के लिए नया फ़ोन no. लेता रहु और नयी id बनाता रहु. आम लोगो को इसतरह से क्यों परेशान किया जा रहा है. ये बात मानता हु की दलाल और जाल-साजो से निपटने के लिए आपने ये व्यवश्था  की है पर इससे आम लोगो को ही तकलीफ हो रही है. दलाल तो फिर भी रोज के फ़ोन no. और ईमेल id बनाते होंगे पर बिचारे आम लोगो का क्या, वो तो ५-६ महीने में एकाध बार सफर करते है,उनको परेशान क्यों किया जाता है और जब एक बार आप फ़ोन no और मेल id verify कर देते हो फिर उसको बिना वजह डीएक्टिवेट करने का क्या मतलब? परेशानी सिर्फ इतनी ही नहीं है प्रभु जी अभी मैंने २ महीने पहले सफर किया तो में अपनी पत्नी,२ छोटे बच्चे और वृद्ध माँ के साथ जैन तीर्थ मोहनखेड़ा(मध्य प्रदेश) गया. टिकट लिया तो कुछ वेटिंग लिस्ट था मुझे लगा कन्फर्म हो जाएगा. जैसे ही वेटिंग चार्ट बना तो परेशान हो गया की हमारी ५ सीटों में से कोई भी सीट साथ-साथ नहीं थी कोई S-2 में थी तो कोई S-८ मे एक आध सीट इधर उधर होती तो बात समझ आती और एडजस्टमेंट कर लेते लेकिन यहाँ तो सारी सीट्स इधर उधर थी. सोचा की चलो ट्रैन में यात्रियों से रिक्वेस्ट करके कुछ सीट्स की एडजस्टमेंट कर लेंगे पर वहां भी लोगो को यही तकलीफ, वेटिंग वाले किसी की टिकट साथ मे नहीं थी और कुछ अड़ियल यात्री ऐसे जो सीट्स की एडजस्टमेंट को तैयार ही नहीं, अब मैं बच्चों को अलग भेजकर या अपनी ओल्ड एज्ड माँ को कहा दूसरे दूर डिब्बे में भेजु. और यही परेशानी वापस आने में भी हुई, यात्रा इतनी बुरी रही की हमारे पुरे ५ टिकट होने के बावजूद हम नहीं सो पाये और २ सीट्स पे ही पुरे दिन बैठना पड़ा अब मैं बच्चों और माँ को तो अकेले दूसरे दूर डिब्बों में नहीं भेज सकता. इस तरीके की मुसीबत आज तक पहले कभी नहीं हुई हर बार मुझे वेटिंग लिस्ट के बाद कन्फर्म टिकट्स पुरे परिवार के साथ एक ही लाइन मे मिलते थे, अबकी बार ऐसा हुआ और मेरे साथ ही नहीं कई दूसरे यात्री भी इसी तरह परेशान हुए. बताया गया की अभी भारतीय रेल ने नया सॉफ्टवेयर अपडेट किया है तो टिकट्स ऐसे ही कन्फर्म होते है. बड़ी मुसीबत ये है की वेटिंग लिस्ट के बाद सीटों की जानकारी यात्रा करने के सिर्फ २ घंटे पहले ही मिलती है तो इतनी जल्दी यात्रा भी कैंसिल नहीं कर सकते. प्रभुजी कृपया आप ये देखिये की ऐसे क्यों हो रहा है, यात्रियों को बिना परेशानी सफर करवाना आपकी जवाबदेही है और आपने तो ऐसा सॉफ्टवेयर अपडेट कर दिया है की जो बिचारे फैमिलीवाले लोग है उनकी मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी है. रोज आपके बड़े-बड़े आर्टिकल्स मीडिया में पढता हु टीवी पे देखता हु, रोज आप लाखो-करोड़ो रूपए अपनी प्रशंशा पे खर्च करवा रहे है, उसकी कोई बात नहीं आप मंत्री है तो ये तो करेंगे ही पर प्लीज एक आपसे विनती है की आप आम लोगो का भी थोड़ा ध्यान रखिये और उनको परेशान मत होने दीजिये और ऐसे एक्सपेरिमेंट्स मत कीजिये जिससे आम और फैमिली क्लास वाले लोगो की यात्रा दूभर हो जाए. धन्यवाद. भारत मत की जय.

Saturday, 20 February 2016

Nationalism Explanation by "NDTV" and its News Anchor Mr. "Ravish Kumar" (NDTV का राष्ट्रवाद)

जो बुद्धिजीवी लोग NDTV की खबरों को देख कर असमंजस मे पड़ गए है की "राष्ट्रभक्ति" किसे कहते है वो इस वीडियो को जरूर देखे की कैसे कुछ पत्रकार, नेता और बुद्धिजीवी लोग इस बात पर भी आपत्ति जता रहे है और सवाल पूछ रहे है की देश की यूनिवर्सिटीज मे तिरंगा झंडा फहराना क्यों जरुरी किया जाए? उनके हिसाब से भारत की शान का प्रतिक "तिरंगा झंडा" फहराना भी एक तरीके का "अति राष्ट्रवाद" है और वो आम लोगो मै नहीं होना चाहिए. बहुत अफसोस होता है देश के इन पढ़े लिखे बुद्धिजीवियों पर और इनकी सोच पर और "राष्ट्रवाद" की इनकी बनाई हुई अपनी परिभाषा पर.  इनको देख कर ऐसा प्रतीत होता है या तो ये देश के गद्दारो की भाषा बोल रहे है या तो ये अपने आपको एक ऐसा बुद्धिजीवी इंसान बताने की चाहत रखते है जो आम लोगो से अलग सोचता है जिसे ये बुद्धजीवी  लोग कहते है "OUT OF THE BOX THINKING".देश के एक गरीब ठेले वाले को भी समझ होती है की देश के खिलाफ "हिंदुस्तान मुर्दाबाद","भारत के टुकड़े होंगे हजार" और "अफजल हम शर्मिंदा है तेरे कातिल जिन्दा है" नारे लगाने वाले देशद्रोही होते है पर अफ़सोस कितनी बड़ी विडम्बना है की "आउट ऑफ़ द बॉक्स थिंकिंग थ्योरी" रखने वाले इन बुद्धि जीवी लोगो को इस पर भी आत्ममंथन और विचार करना पड़ता है की ऐसे लोगो को देश विरोधी तत्व कहा जाए या नहीं. कुछ न्यूज़ चैनल्स जो नारो का वीडियो चलाया जा रहा है उसपे शक कर रहे है की हो सकता है इन कुछ विडोयोज के साथ छेड़ छाड़ हुई हो. चलो एक बार मान भी लिया जाए की विडोयोज से छेद-छाड़ की गयी हो पर जब वो ही लोग न्यूज़ डिबेट मै आकर भी वो ही भाषा बोल रहे है की "कश्मीर को आज़ाद करो" और "आतंकवादियों का समर्थन" कर रहे हो तो एक बड़ा सवाल ये उठता है की फिर इन्हे क्यों गलत ना माना जाए और क्यों इनको देशद्रोहियो के कटघरे में खड़ा ना किया जाए? NDTV के सवांददाता जिस तरीके का "राष्ट्रवाद" लोगो को चुनने की सलाह दे रहे है अगर उसपे पूरा हिंदुस्तान अमल करने लगेगा तो आप सोचिये इस देश का क्या हाल होगा.
NDTV के "राष्ट्रवाद'" को समझकर कोई देश की फौज मै भर्ती ही नहीं होगा, क्यों की NDTV के "राष्ट्रवाद" के पैमाने से देश क्या है? कुछ भी नहीं है. कोई भी इंसान भारत की सीमाओ की दुश्मनो से रक्षा क्यों करे और क्यों अपने प्राणो की आहुति दे? उसे तो अपने घर परिवार के साथ रह कर ही कुछ काम धंधा करना चाहिए, वो देश के आम लोगो के लिए अपनी जान क्यों दे जबकि वो अपने परिवार के अलावा बाकी लोगो को जानता ही नहीं. लोग मरे तो मरे उसका क्या. NDTV के "राष्ट्रवाद" के पैमाने से ना कोई आर्मी ज्वाइन करेगा ना कोई पुलिस बनकर आम लोगो को हत्यारों और चोर उच्चको से बचाने की कोशिश करेगा. वो आम लोगो को बचाने का खतरा क्यों मोल ले. फिर ना तो कोई हनुमनथप्पा होगा न संदीप उन्नीकृष्णन होगा और ना कोई तुकाराम ओम्ब्ले होगा, सबको अपनी जान प्यारी है भाई, अपनी जान देश के लिए क्यों दे. अगर पाकिस्तान से कसाब आकर खुलेआम लोगो को AK-47 लेकर मार रहा है तो मारने दो भैया, चीन,पाकिस्तान मिलके देश पर हमला करे तो करने दो,हमें क्या? जब हमारे ऊपर हमला करेगा तो ही हम कुछ करेंगे. NDTV की राष्टृवाद परिभाषा मान कर इस देश मे ना कभी भगत सिंह पैदा हो पायेगा और न ही कोई महात्मा ग़ांधी बन पायेगा. एक सच्चाई ये भी है की अगर आम लोगो मै सच्चा राष्ट्रवाद न पनपा होता तो शायद इस देश को आजादी मिलना भी नामुमकिन था और वो राष्ट्रवाद इन बुद्धिजीवी NDTV के संपादको की परिभाषा से काफी हद तक विपरीत है. NDTV आम लोगो को यही राष्ट्रवाद समझाना चाहता है. जो राष्ट्रवाद नहीं एक तरीके का सेल्फवाद और मूर्खवाद है. अभी तो ऐसा प्रतीत होता है की ये आम लोगो को गुमराह करने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. जो लोग पहले चुप रह कर इन देश विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे थे वो आज अपने पुरे दल-बल से बिल से बाहर निकल चुके है और लोगो को एक ऐसी समझ दे रहे है जो वाकई एक अखंड देश के लिए बेहद खतरनाक है. अगर इनकी मानसिकता लोगो मै बैठ गयी तो सचमुच देश के टुकड़े होते टाइम नहीं लगेगा और उसी दिशा मे इन्होने बड़ा कदम उठा दिया है, जो पहले काम गुपचुप तरीके से हो रहा था वो आज खुलेआम खुल्लम-खुल्ला हो रहा है और इसके लिए वो कुछ ख़ास समुदाय को अपने पक्ष मै करके इस प्लान को अंजाम दे रहे है. आज सोचने का समय उस धार्मिक समुदाय के लिए भी है जो इनके मायाजाल मे फंस चुके है. आप तय कीजिये की इस भारत देश को तोड़कर क्या आप पाकिस्तान और ISIS जैसे संघटन के साथ मिलकर खुश रह पाएंगे? याद रखिये भारत देश ही आपका अंतिम और आखरी सहारा है, अगर इसकी बर्बादी करने वाले लोगो मै आप शामिल हो गए तो आपका भविष्य बिलकुल भी सुरक्षित नहीं रहेगा. सब साथ है तो ये देश है अगर अलग हो गए तो कुछ भी नहीं और ये देश विरोधी ताकते ये ही चाहती है आप खुद तय कर लीजिये की आपको इन देश के गद्दारो और लोगो को गुमराह करनेवाले और अपने आप को आम लोगो का हितेषी बताने वाले मीडिया जैसे NDTV के एंकर रविश कुमार की बातो मै आना है, या उन देश विभाजक ताकतों का विरोध करना है. सोचते समय जरा ध्यान रखना इन बिकाऊ मीडिया लोगो के सम्बन्ध उन लोगो से है जो खुल्ले आम देश के खिलाफ नारा लगाते है की 'भूका नंगा हिंदुस्तान, जान से प्यारा पाकिस्तान". आप तय कर लीजिये आप को क्या चुनना है. जय हिन्द. (Arundhati Roy is a cousin of prominent media personality Prannoy Roy, the head of the leading Indian TV media group NDTV. Ye Arundhati Roy wahi hai jisne naare lagaye the "BHOOKA NANGA HINDUSTAN, JAAN SE PYARA PAKISTAN").

Friday, 8 January 2016

Intolerance in India. भारत में असहिष्णुता

क्युकी कुछ (1%) जैन नॉन वेज, मांस, मछली, अंडा खाते है तो हम जैन रिलिजन के लोगो के ऊपर ये टैग नहीं लगा सकते की वो नॉन वेजिटेरिअन होते है उसी तरह कुछ मुस्लमान जो कट्टर देशभक्त है उनके आधार पर हर मुसलमान को देशभक्त होने का शर्टिफिकट नहीं दिया जा सकता।  मैं इस्लाम धर्म के खिलाफ नहीं हु और ना ही किसी धर्म के साथ हु या उसका कट्टर समर्थक हु क्युकी आज के धर्म मानवता सिखाने की बजाय आडम्बर,ढोंग, और दिखावे तक सिमित रह गए है, जो आम लोगो को और समाज को अंदर से खोखला बना रहे है. लोग करते कुछ है, दिखाते कुछ है और अंदर से कुछ और ही होते है. मैं उन मुसलमानो के खिलाफ हु जो प्रोपगेंडा चलाकर काम कर रहे है. वो अपनी कॉम के लोगो को डरा धमकाकर रखते है और हिदायत दी जाती है की वो आँखे बंद करके उनका समर्थन करे और अगर कोई उनके खिलाफ बोलेगा तो उनके खिलाफ वो फतवा निकल देंगे और उनका समाज में जीना हराम कर देंगे. कुछ मोलवी उनको जबरदस्ती देश के खिलाफ चलने का पाठ पढ़ाते है, ताकि वो धर्म को तरहीज देकर उनके लिए गुलाम बनकर जीते रहे और उन मौलवियो की रोटिया ऐसे ही सिकती रहे. और जो इनके खिलाफ कुछ भी कहेगा तो या तो वो उसे इस्लाम के विरुद्ध युद्ध(जिहाद) करार देकर उनकी कॉम के लोगो को भड़काएंगे और मार काट करवाएंगे और अगर कोई इनकी कॉम का ही इंसान इनके प्रोपगेंडा के खिलाफ बोलेगा तो उसे फतवे जारी कर कॉम का गद्दार करार दे दिया जायेगा. आप देखिये जो नेक, सच्चे हिंदुस्तानी मुस्लमान है जैसे ए आर रहमान, अब्दुल कलाम उनके खिलाफ इन मौलवियो ने जमके फतवे निकाले है. ये मोलवी चाहते है की लोग देश के लिए ना झुके, राष्ट्र गीत ना गए, राष्ट्र गान का सम्मान ना करे बस इन मौलवियो के तलवे ही चाटते रहे और जब मोलवी साहब कहे तो इस्लाम धर्म की रक्षा के नाम पर तलवारे, बन्दुके उठा कर खून खराबा करते रहे. ये आम मासूम मुसलमानो को गवार और इल्लॉजिकल बनाना चाहते है ताकि वो बिना अपना दिमाक चलाये वो सब करे जो ये मोलवी साहब चाहते है और इसके लिए वो कुछ इस्लाम की किताबो का सहारा लेते है यही कारण है की अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग भी जल्द ही आतंकवाद की राह पर निकल पड़ते है. ये अपनी कॉम के लोगो को इतने धार्मिक कट्टरवादी बनाना चाहते है की चाहे किसी भी देश मे किसी भी मुद्दे पर हिंसा हो रही हो अगर मुसलमानो को कोई कुछ कहेगा तो ये सारे इस्लामिक देश एक होकर हंगामा कर देंगे और जो नॉन-इस्लामिक लोग इनके देश में रहते होंगे उनपर भी हिंसा के लिए उतारू हो जाएंगे, इनको ये सिखाया जाता है की चाहे मुस्लमान गलत ही क्यों ना हो हमें उनका सपोर्ट करना चाहिए और इसके लिए वो झूठी कहानिया गढ़ने लगते है, जैसे 9/11 अमेरिकन अटैक मे हुआ या 26/11 मुंबई अटैक पे हुआ, इन्होने हर इस्लामिक देश मे ये झूठी बाते फैलाना चालू कर दिया की ये तो इन्ही मुल्को ने जान भुझकर घटना को अंजाम दिया है और इस्लाम धर्म के लोगो को बदनाम कर रहे है. हिंदुस्तान मे असहिष्णुता (इनटॉलेरेंस) का मुद्दा उठाने का प्रोपगेंडा भी इन्ही लोगो की देन है. जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया गया वो बेहद हैरान करनेवाला था. अगर इस तरह का मुद्दा गोधरा कांड या 1984 सिख दंगा या भागलपुर दंगे के समय उठाया जाता तो बात समझ में आ सकती थी की उस समय सच में कुछ दंगे हुए थे और मासूम लोग मरे थे पर अभी तो ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था, सब धर्म के लोग आराम से खा पीके मज़े कर रहे थे तो अभी बिना काम के हिन्दुओ को और भारत को बदनाम करने की क्या जरुरत आ पड़ी थी? सच्चाई ये है की ये कॉंग्रेस्स के राज में बहुत ज्यादा शेर हो चुके थे, कुछ भी करते और इनको वोट बैंक के आधार पर पोलिटिकल पार्टिया जमके छूट देती थी. भारत इनके बाप की जागीर बन गया था और जब बीजेपी की सरकार आई और ऐसे आवारागर्द लोगो को डंडा दिखाना शुरू किया तो इनको तकलीफ शुरू हो गयी और इन्होने जमके हिन्दुओ को और हिंदुस्तान को बदनाम करना शुरू कर दिया. अफ़सोस इस बात का है की कुछ कट्टरवादी मुस्लमान आम हिन्दू और गैर इस्लामिक लोगो को अपनी बेगम की तरह अपने पेरो के निचे रखना चाहते है जिस तरह ये अपनी औरतो के साथ करते है की खुद चाहे 3 शादिया कर ले और जी भर के अय्याशिया कर ले पर अपनी औरत के साथ पूरी जिंदगी एक जानवर की तरह सलूक करते है, उनको चार दिवारी में कैद कर रखा जाता है, उनको बाहर निकलना है तो चाहे गर्मी हो या शर्दी इनको सर से पैर तक बुरखा पहन के निकलना पड़ता है., ठीक वैसा ही व्यवहार ये आम हिन्दू और गैर इस्लामिक लोगो के साथ करना चाहते है, ये चाहते है की वो हमेशा इनके सामने सिर झुकाये खड़े रहे और इनकी हाँ में हाँ मिलाये नहीं तो ये कुछ और दूसरे बहाने बनाके उनके खिलाफ जंग (जिहाद) का एलान कर देंगे. ठीक वैसे ही इन्होने इनटॉलेरेंस का मुद्दा उठाके करना चाहा. की खुद अगर मार काट का नंगा नाच करेंगे तो कोई बात नहीं और अगर कोई इंसान इनकी दादागिरी से तंग आकर कुछ इनके बारे में बोल दे तो ये उसे बड़ा मुद्दा बनाके 58 इस्लामिक देशो के साथ मिलके उसका जबर्दश्त बढ़ा चढ़ा कर झूठा प्रचार करना शुरू कर देंगे और देश को पूरी दुनिया में बदनाम कर देंगे. ये जब किसी देश में अल्प संख्यक होते है तो अल्पसंख्यक होने की दुहाई दे कर कई अधिकार हासिल कर लेते है और जब अपनी आबादी दिन दूना रात चौगुना बढाकर बहुसंख्यक हो जाते है तो फिर सरिया कानून लाकर अल्पसंख्यक लोगो पर अत्याचार करना शुरू कर देते है. फिर या तो अल्पसंख्यको को मजबूरी में धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम होना पड़ता है या देश छोड़के भागना पड़ता है. ये वास्तविकता है चाहे आप हर इस्लामिक देश का इतिहास उठा के पढ़ लीजिये. पहले तो वो वहा सरणार्थी बनके रहेंगे और जब इनकी आबादी बढ़ जाएगी तो मूल निवासियों को सरिया कानून लगा के भगा दिया या जबरदस्ती इस्लाम स्वीकार करवाया जायेगा. ये दुखद लेकिन वास्तविकता है और यही इन कट्टरवादी इस्लामिक लोगो का प्रोपोगेंडा भी है की कैसे भी करके देश में अपनी आबादी बढ़ाओ और जब हम बहुसंख्यक हो जाए तो सरिया कानून लगा के गैर मुस्लिम लोगो को भगा दो जैसा इन्होने सीरिया में किया और कश्मीर मे हिन्दू पंडितो के साथ किया. हर मज्जिद में ये घोषणा करवाई गयी की सारे गैर-इस्लामी मर्द अपने घरो को छोड़ के चले जाए और अपनी औरतो, बच्चियों को इनकी अय्याशियों के लिए यही छोड़के जाए, अफ़सोस इस देश की राजनीती इस हद तक गिर चुकी है की कोई इस दरिंदगी और दादागिरी का विरोध नहीं करता एक खास कोम के वोट बैंक के लिए. इन कट्टरवादी मुस्लिम संघटनो को vvip ट्रीटमेंट चाहिए. ये अल्लाह के अलावा किसी के सामने सर नहीं झुकाएँगे, पर हर गैर इस्लामिक इंसान को इनके सामने सर झुकाके जीना पड़ेगा नहीं तो ये उनको चेन से जीने नहीं देंगे. देश कुछ नहीं है, धर्म इनके ऊपर ऐसा सवार रहता है की एक छोटी सी घटना पे मार काट तक पहुंच जाते है. जब उत्तर प्रदेश के एक बड़े मंत्री ने भारत माँ को डायन कहा तो कुछ नहीं पर जब एक हिन्दू वादी नेता ने अल्लाह के बारे में कुछ कह दिया तो पुरे देश में आग लगा दी हर जगह तोड़ फोड़ कर करोडो रूपए की आम लोगो के पैसो से बनाई हुई सरकारी सम्पति को नुक्सान पहुचाया. उसका हर्जाना कौन भरेगा? बड़े अफ़सोस की बात है की ये खुद ही मूर्खता करके अपनी कौम को बदनाम कर रहे है। आज अच्छे मुसलमानो को चाहिए की वो निडर होकर जो मक्कार,धोकेबाज़ और गद्दार मुस्लमान लोग है उनके खिलाफ बोले और उनको बेनकाब करे. वो धर्म से ऊपर अपने देश को तरहीज़ दे क्युकी धर्म के बिना तो इंसान रह सकता है पर देश के बिना नहीं, नहीं तो सीरिया वाली सिचुएशन हिंदुस्तान मे भी जल्दी ही पैदा हो जाएगी क्युकी गलत चीज़े अक़सर जल्दी बढ़ जाती है, और इस देश के गद्दार लोग भी बड़ी तेजी से बढ़  रहे है. किसी के दिल को ये आर्टिकल पढ़के ठेश पहुंची हो तो माफ़ करना, लेकिन कभी-कभी देश हित के लिए कड़वी सच्चाई भी बोलनी पड़ती है. जय हिन्द, वन्दे मातरम.

Sunday, 21 December 2014

Review of Film PK (in Hindi)


Review of PK Film. तो पहले बात करते है फिल्म देखने से पहले उससे जुड़ी एक्सपेक्टेशन की, जब फिल्म देखने जा रहा था तो बहुत ही ज़्यादा एक्सपेक्टेशन्स थी. अमूमन में फिल्म थियेटर्स मे देखने नही जाता क्यूकी आज कल हिन्दी फ़िल्मे उस लेवल की बनती ही नही की 400-500 रुपय खर्च करके उसे थियेटर मे देखा जाए बस कुछ ही फिल्मकार ऐसे है जिनकी मूवी आप अपने दिमाक को साथ मे रखकर देख सकते है ओर उसे थियेटर्स मे देखके रोमांचित हो सकते है. आमिर ख़ान ओर राजकुमार हिरानी उनमे से है जिनकी फ़िल्मे देखने के लिए आप पैसा खर्च कर सकते है क्यूकी उनकी फ़िल्मो मे वो क्वालिटी, वो लेवल होता है की आप पूरी तरह से मनोरन्जीत हो सके. उनकी फ़िल्मो मे लॉजिक होता है, अपनी बात को समझाने का एक अलग तरीका होता है की बात दर्शको के दिमाक मे सीधे घुस जाए. बस फिल्म देखने जा रहा था तो इस बात की चिंता थी की फिल्म Sci-fi genre पे आधारित है तो विदाउट मच स्पेशल-एफेक्ट्स वो बिग बज़ट फिल्म कैसे बेहतर बना सकते है. लेकिन जब मैने फिल्म को देखा तो मेरी ये चिंता पूरी तरीके से ग़लत साबित हुई. फिल्म मे आमिर का एलीयन का किरदार बहुत जबरदस्त तरीके से फिल्माया गया है ओर एक तरीके से उन्होने अच्छा ही किया की फिल्म मे ज़्यादा स्पेशल-एफेक्ट्स नही डाले, नही तो ये संभावना थी की फिल्म को ज़्यादा Sci-fi बनाने के चक्कर मे एलीयन का करेक्टर भटक जाता जैसा फिल्म के दूसरे भाग मे इसकी कहानी के साथ हुआ की दूसरे भाग मे फिल्म की कहानी ही भटक गयी लेकिन फिर भी ये कहना चाहूँगा की फिल्म का पहला भाग इतना जबरदस्त बनाया गया है की दूसरा भाग चाहे बेहतरीन नही हो, फिर भी फिल्म के पहले भाग को देखके ही फिल्म के पैसे वसूल हो जाते है. इस फिल्म के मैं दो रिव्यू देना चाहूँगा एक कहानी के पहले भाग के बारे मे ओर दूसरा कहानी के दूसरे भाग के बारे मे. तो बात करते है कहानी के पहले भाग की-
1. पहला भाग इतना जबरदस्त है की शायद इससे बेहतर ओर कोई हिन्दी फिल्ममेकर बना ही नही सकता था. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर एक्टिंग तक हर जगह पूरी टीम का हार्ड वर्क दिखता है. फिल्म मे जो कोइंसिडेंट्स बनाए गये है वो जबरदस्त है, कैसे हिंदू महिला के लिए सफेद वस्त्र का मतलब पती की मौत से है लेकिन वही क्रिस्चियन के लिए ये शादी की पोशाक है, गाँधीजी की वॅल्यू लोग सिर्फ़ पैसो के नोट पे ही करते है, सेल्फ़ डिफेन्स आइडिया ओर ऐसे बहुत सारे रिलिजन ओर आम लोगो की विचित्र सोच पे सीन्स फिल्माए गये है जो लाजवाब है. जो एलीयन का इस दुनिया मे आके इस दुनिया को धीरे-धीरे जानने का पार्ट बनाया गया है(आमिर ये फ्लॅश बॅक अनुष्का को सुना रहा है) ये भाग इस फिल्म का सबसे मजबूत ओर बहुत ही मज़ेदार भाग है. इस भाग मे सिचुयेशनल कॉमेडी ऐसे बनाई गयी है की सामने वाले को देखते ही हॅसना जाए. दूसरी बेकार फ़िल्मो ओर इस फिल्म मे ये ही बड़ा डिफरेन्स है की दूसरी फ़िल्मो मे लोगो को ज़बरदस्ती हसाने का प्रयास किया जाता है लेकिन इस फिल्म मे ऐसा बिल्कुल भी नही है. सिचुयेशन्स ही ऐसी पैदा की गयी है की हसना आए ओर इस तरीके की कॉमेडी बनाना शायद बहुत-बहुत मुश्किल काम है. इसकी कॉमेडी को देख कर मुझे पहली हेरा-फेरी फिल्म की याद गयी, उस फिल्म मे भी सिचुयेशनल कॉमेडी पैदा की गयी थी ओर परेश रावल की एक्टिंग जबरदस्त थी, इस फिल्म मे भी सिचुयेशन ऐसी ही जबरदस्त बनाई गयी है की लोगो को सिचुयेशन देखके ही हसना जाए ओर आमिर ख़ान की एक्टिंग भी लाजवाब है. पहले भाग की जो पटकथा लिखी गयी है वो उम्दा है ओर इस पे बहुत मेहनत की गयी है, आमिर ख़ान की एक्टिंग लाजवाब है. राजू हिरानी का डाइरेकशन भी अच्छा है. बस कही-कही सॉंग के आस-पास फिल्म थोड़ी आर्टिफिशियल ड्रामा दिखने लगती है. फिल्म के पहले भाग का कॉन्सेप्ट भी अच्छा है की एक ऐसा इंसान जो दूसरी दुनिया से आया है उसे यहा लोगो का सोचने का तरीका कैसे अजीब लगता है ओर ये भी खूबसूरती से दिखाया गया है की उसे अजीब लगता है जब हम एक दूसरे को बोलकर अपनी भावनाए व्यक्त करते है ओर वो भी झूठी जबकि इनकी दुनिया मे लोग बात ही नही करते, झूठ बोलना तो दूर की बात है ये एक दूसरे से बात करके नही बस हाथ पकड़ के बात समझते है. ओवरऑल फिल्म का पहला भाग जबरदस्त है, लॉजिक का अच्छा इस्तेमाल किया गया है, फिल्म बिना रुके चलती रहती है ओर जबरदस्त मनोरंजन करती रहती है.
2. अब आते है कहानी के दूसरे भाग पर तो इस फिल्म के दूसरे भाग को देख कर बिल्कुल नही लगता की इसके दूसरे भाग की कहानी उसने ही लिखी है जिसने पहले भाग को लिखा है. फिल्म लॉजिक को किनारे करने लगती है, फिल्म लंबी खिचने लगती है ओर पूरी तरह से भटक जाती है. शायद कुछ ज़्यादा मेसेज देने के चक्कर मे कहानी की पूरी खिचड़ी बन गयी है. वो शुरू कहा हुई थी ओर कौनसी दिशा ले ली. फिल्म का दूसरा भाग देख कर बहुत अफ़सोस होता है,शायद दूसरे भाग तक पहुचते-पहुचते उनको इस फिल्म को बनाने का क्रेज़ कम हो गया होआमिर ख़ान की एक्टिंग के अलावा दूसरे भाग मे ऐसा कुछ ओर बेहतर देखने को नही है. टीवी एंकर रिपोर्टिंग, बाबा से बहस, बॉम्ब ब्लास्ट ओर कई ऐसे सीन्स बहुत ही बचकाने है, जो कहानी को कोई नयी दिशा नही देते. यकीन नही होता की ये दूसरा पार्ट राजू हिरानी ओर आमिर ख़ान ने ही बनाया है जो अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है,वैसे कुछ सीन्स ओर थोड़े लॉजिकल एग्ज़ांप्ल अच्छे है पर उस लेवल के नही है जैसे सीन्स फर्स्ट पार्ट मे है. शायद आमिर ख़ान को सुपर इंटेलिजेंट दिखाने के चक्कर मे स्टोरी पटरी से उतर गयी. कहानी को अगर कोई ओर दिलचस्प नयी दिशा मे मोड़ा जाता तो बेहतर होता. लेकिन फिर भी मैं इस फिल्म के पहले भाग से ही इतना इंप्रेस्ड हूँ ओर इतना एंटरटेनमेंट हुआ है की अगर फिल्म का दूसरा भाग बेकार था तो भी उससे कुछ ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा ओर मेरे पैसे वसूल हो गये, बट आमिर ओर राज कुमार हिरानी को आगे ध्यान रखना चाहिए ओर ओवरकॉन्फिडेन्स से बचना चाहिए. आप अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है जो नाच गाने ओर उछल कूद की बजाए फिल्म की कहानी पे फोकस करते है ओर दूसरे पार्ट मे फिल्म जिस तरह से बिखरी है वो बहुत ज़्यादा निराश करती है. Hope they will not repeat their mistakes again and will see both(aamir and rajkumar hirani) super hit jodi once again soon with brilliant different concept. Thanx :)