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Friday, 8 January 2016

Intolerance in India. भारत में असहिष्णुता

क्युकी कुछ (1%) जैन नॉन वेज, मांस, मछली, अंडा खाते है तो हम जैन रिलिजन के लोगो के ऊपर ये टैग नहीं लगा सकते की वो नॉन वेजिटेरिअन होते है उसी तरह कुछ मुस्लमान जो कट्टर देशभक्त है उनके आधार पर हर मुसलमान को देशभक्त होने का शर्टिफिकट नहीं दिया जा सकता।  मैं इस्लाम धर्म के खिलाफ नहीं हु और ना ही किसी धर्म के साथ हु या उसका कट्टर समर्थक हु क्युकी आज के धर्म मानवता सिखाने की बजाय आडम्बर,ढोंग, और दिखावे तक सिमित रह गए है, जो आम लोगो को और समाज को अंदर से खोखला बना रहे है. लोग करते कुछ है, दिखाते कुछ है और अंदर से कुछ और ही होते है. मैं उन मुसलमानो के खिलाफ हु जो प्रोपगेंडा चलाकर काम कर रहे है. वो अपनी कॉम के लोगो को डरा धमकाकर रखते है और हिदायत दी जाती है की वो आँखे बंद करके उनका समर्थन करे और अगर कोई उनके खिलाफ बोलेगा तो उनके खिलाफ वो फतवा निकल देंगे और उनका समाज में जीना हराम कर देंगे. कुछ मोलवी उनको जबरदस्ती देश के खिलाफ चलने का पाठ पढ़ाते है, ताकि वो धर्म को तरहीज देकर उनके लिए गुलाम बनकर जीते रहे और उन मौलवियो की रोटिया ऐसे ही सिकती रहे. और जो इनके खिलाफ कुछ भी कहेगा तो या तो वो उसे इस्लाम के विरुद्ध युद्ध(जिहाद) करार देकर उनकी कॉम के लोगो को भड़काएंगे और मार काट करवाएंगे और अगर कोई इनकी कॉम का ही इंसान इनके प्रोपगेंडा के खिलाफ बोलेगा तो उसे फतवे जारी कर कॉम का गद्दार करार दे दिया जायेगा. आप देखिये जो नेक, सच्चे हिंदुस्तानी मुस्लमान है जैसे ए आर रहमान, अब्दुल कलाम उनके खिलाफ इन मौलवियो ने जमके फतवे निकाले है. ये मोलवी चाहते है की लोग देश के लिए ना झुके, राष्ट्र गीत ना गए, राष्ट्र गान का सम्मान ना करे बस इन मौलवियो के तलवे ही चाटते रहे और जब मोलवी साहब कहे तो इस्लाम धर्म की रक्षा के नाम पर तलवारे, बन्दुके उठा कर खून खराबा करते रहे. ये आम मासूम मुसलमानो को गवार और इल्लॉजिकल बनाना चाहते है ताकि वो बिना अपना दिमाक चलाये वो सब करे जो ये मोलवी साहब चाहते है और इसके लिए वो कुछ इस्लाम की किताबो का सहारा लेते है यही कारण है की अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग भी जल्द ही आतंकवाद की राह पर निकल पड़ते है. ये अपनी कॉम के लोगो को इतने धार्मिक कट्टरवादी बनाना चाहते है की चाहे किसी भी देश मे किसी भी मुद्दे पर हिंसा हो रही हो अगर मुसलमानो को कोई कुछ कहेगा तो ये सारे इस्लामिक देश एक होकर हंगामा कर देंगे और जो नॉन-इस्लामिक लोग इनके देश में रहते होंगे उनपर भी हिंसा के लिए उतारू हो जाएंगे, इनको ये सिखाया जाता है की चाहे मुस्लमान गलत ही क्यों ना हो हमें उनका सपोर्ट करना चाहिए और इसके लिए वो झूठी कहानिया गढ़ने लगते है, जैसे 9/11 अमेरिकन अटैक मे हुआ या 26/11 मुंबई अटैक पे हुआ, इन्होने हर इस्लामिक देश मे ये झूठी बाते फैलाना चालू कर दिया की ये तो इन्ही मुल्को ने जान भुझकर घटना को अंजाम दिया है और इस्लाम धर्म के लोगो को बदनाम कर रहे है. हिंदुस्तान मे असहिष्णुता (इनटॉलेरेंस) का मुद्दा उठाने का प्रोपगेंडा भी इन्ही लोगो की देन है. जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया गया वो बेहद हैरान करनेवाला था. अगर इस तरह का मुद्दा गोधरा कांड या 1984 सिख दंगा या भागलपुर दंगे के समय उठाया जाता तो बात समझ में आ सकती थी की उस समय सच में कुछ दंगे हुए थे और मासूम लोग मरे थे पर अभी तो ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था, सब धर्म के लोग आराम से खा पीके मज़े कर रहे थे तो अभी बिना काम के हिन्दुओ को और भारत को बदनाम करने की क्या जरुरत आ पड़ी थी? सच्चाई ये है की ये कॉंग्रेस्स के राज में बहुत ज्यादा शेर हो चुके थे, कुछ भी करते और इनको वोट बैंक के आधार पर पोलिटिकल पार्टिया जमके छूट देती थी. भारत इनके बाप की जागीर बन गया था और जब बीजेपी की सरकार आई और ऐसे आवारागर्द लोगो को डंडा दिखाना शुरू किया तो इनको तकलीफ शुरू हो गयी और इन्होने जमके हिन्दुओ को और हिंदुस्तान को बदनाम करना शुरू कर दिया. अफ़सोस इस बात का है की कुछ कट्टरवादी मुस्लमान आम हिन्दू और गैर इस्लामिक लोगो को अपनी बेगम की तरह अपने पेरो के निचे रखना चाहते है जिस तरह ये अपनी औरतो के साथ करते है की खुद चाहे 3 शादिया कर ले और जी भर के अय्याशिया कर ले पर अपनी औरत के साथ पूरी जिंदगी एक जानवर की तरह सलूक करते है, उनको चार दिवारी में कैद कर रखा जाता है, उनको बाहर निकलना है तो चाहे गर्मी हो या शर्दी इनको सर से पैर तक बुरखा पहन के निकलना पड़ता है., ठीक वैसा ही व्यवहार ये आम हिन्दू और गैर इस्लामिक लोगो के साथ करना चाहते है, ये चाहते है की वो हमेशा इनके सामने सिर झुकाये खड़े रहे और इनकी हाँ में हाँ मिलाये नहीं तो ये कुछ और दूसरे बहाने बनाके उनके खिलाफ जंग (जिहाद) का एलान कर देंगे. ठीक वैसे ही इन्होने इनटॉलेरेंस का मुद्दा उठाके करना चाहा. की खुद अगर मार काट का नंगा नाच करेंगे तो कोई बात नहीं और अगर कोई इंसान इनकी दादागिरी से तंग आकर कुछ इनके बारे में बोल दे तो ये उसे बड़ा मुद्दा बनाके 58 इस्लामिक देशो के साथ मिलके उसका जबर्दश्त बढ़ा चढ़ा कर झूठा प्रचार करना शुरू कर देंगे और देश को पूरी दुनिया में बदनाम कर देंगे. ये जब किसी देश में अल्प संख्यक होते है तो अल्पसंख्यक होने की दुहाई दे कर कई अधिकार हासिल कर लेते है और जब अपनी आबादी दिन दूना रात चौगुना बढाकर बहुसंख्यक हो जाते है तो फिर सरिया कानून लाकर अल्पसंख्यक लोगो पर अत्याचार करना शुरू कर देते है. फिर या तो अल्पसंख्यको को मजबूरी में धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम होना पड़ता है या देश छोड़के भागना पड़ता है. ये वास्तविकता है चाहे आप हर इस्लामिक देश का इतिहास उठा के पढ़ लीजिये. पहले तो वो वहा सरणार्थी बनके रहेंगे और जब इनकी आबादी बढ़ जाएगी तो मूल निवासियों को सरिया कानून लगा के भगा दिया या जबरदस्ती इस्लाम स्वीकार करवाया जायेगा. ये दुखद लेकिन वास्तविकता है और यही इन कट्टरवादी इस्लामिक लोगो का प्रोपोगेंडा भी है की कैसे भी करके देश में अपनी आबादी बढ़ाओ और जब हम बहुसंख्यक हो जाए तो सरिया कानून लगा के गैर मुस्लिम लोगो को भगा दो जैसा इन्होने सीरिया में किया और कश्मीर मे हिन्दू पंडितो के साथ किया. हर मज्जिद में ये घोषणा करवाई गयी की सारे गैर-इस्लामी मर्द अपने घरो को छोड़ के चले जाए और अपनी औरतो, बच्चियों को इनकी अय्याशियों के लिए यही छोड़के जाए, अफ़सोस इस देश की राजनीती इस हद तक गिर चुकी है की कोई इस दरिंदगी और दादागिरी का विरोध नहीं करता एक खास कोम के वोट बैंक के लिए. इन कट्टरवादी मुस्लिम संघटनो को vvip ट्रीटमेंट चाहिए. ये अल्लाह के अलावा किसी के सामने सर नहीं झुकाएँगे, पर हर गैर इस्लामिक इंसान को इनके सामने सर झुकाके जीना पड़ेगा नहीं तो ये उनको चेन से जीने नहीं देंगे. देश कुछ नहीं है, धर्म इनके ऊपर ऐसा सवार रहता है की एक छोटी सी घटना पे मार काट तक पहुंच जाते है. जब उत्तर प्रदेश के एक बड़े मंत्री ने भारत माँ को डायन कहा तो कुछ नहीं पर जब एक हिन्दू वादी नेता ने अल्लाह के बारे में कुछ कह दिया तो पुरे देश में आग लगा दी हर जगह तोड़ फोड़ कर करोडो रूपए की आम लोगो के पैसो से बनाई हुई सरकारी सम्पति को नुक्सान पहुचाया. उसका हर्जाना कौन भरेगा? बड़े अफ़सोस की बात है की ये खुद ही मूर्खता करके अपनी कौम को बदनाम कर रहे है। आज अच्छे मुसलमानो को चाहिए की वो निडर होकर जो मक्कार,धोकेबाज़ और गद्दार मुस्लमान लोग है उनके खिलाफ बोले और उनको बेनकाब करे. वो धर्म से ऊपर अपने देश को तरहीज़ दे क्युकी धर्म के बिना तो इंसान रह सकता है पर देश के बिना नहीं, नहीं तो सीरिया वाली सिचुएशन हिंदुस्तान मे भी जल्दी ही पैदा हो जाएगी क्युकी गलत चीज़े अक़सर जल्दी बढ़ जाती है, और इस देश के गद्दार लोग भी बड़ी तेजी से बढ़  रहे है. किसी के दिल को ये आर्टिकल पढ़के ठेश पहुंची हो तो माफ़ करना, लेकिन कभी-कभी देश हित के लिए कड़वी सच्चाई भी बोलनी पड़ती है. जय हिन्द, वन्दे मातरम.

Sunday, 21 December 2014

Review of Film PK (in Hindi)


Review of PK Film. तो पहले बात करते है फिल्म देखने से पहले उससे जुड़ी एक्सपेक्टेशन की, जब फिल्म देखने जा रहा था तो बहुत ही ज़्यादा एक्सपेक्टेशन्स थी. अमूमन में फिल्म थियेटर्स मे देखने नही जाता क्यूकी आज कल हिन्दी फ़िल्मे उस लेवल की बनती ही नही की 400-500 रुपय खर्च करके उसे थियेटर मे देखा जाए बस कुछ ही फिल्मकार ऐसे है जिनकी मूवी आप अपने दिमाक को साथ मे रखकर देख सकते है ओर उसे थियेटर्स मे देखके रोमांचित हो सकते है. आमिर ख़ान ओर राजकुमार हिरानी उनमे से है जिनकी फ़िल्मे देखने के लिए आप पैसा खर्च कर सकते है क्यूकी उनकी फ़िल्मो मे वो क्वालिटी, वो लेवल होता है की आप पूरी तरह से मनोरन्जीत हो सके. उनकी फ़िल्मो मे लॉजिक होता है, अपनी बात को समझाने का एक अलग तरीका होता है की बात दर्शको के दिमाक मे सीधे घुस जाए. बस फिल्म देखने जा रहा था तो इस बात की चिंता थी की फिल्म Sci-fi genre पे आधारित है तो विदाउट मच स्पेशल-एफेक्ट्स वो बिग बज़ट फिल्म कैसे बेहतर बना सकते है. लेकिन जब मैने फिल्म को देखा तो मेरी ये चिंता पूरी तरीके से ग़लत साबित हुई. फिल्म मे आमिर का एलीयन का किरदार बहुत जबरदस्त तरीके से फिल्माया गया है ओर एक तरीके से उन्होने अच्छा ही किया की फिल्म मे ज़्यादा स्पेशल-एफेक्ट्स नही डाले, नही तो ये संभावना थी की फिल्म को ज़्यादा Sci-fi बनाने के चक्कर मे एलीयन का करेक्टर भटक जाता जैसा फिल्म के दूसरे भाग मे इसकी कहानी के साथ हुआ की दूसरे भाग मे फिल्म की कहानी ही भटक गयी लेकिन फिर भी ये कहना चाहूँगा की फिल्म का पहला भाग इतना जबरदस्त बनाया गया है की दूसरा भाग चाहे बेहतरीन नही हो, फिर भी फिल्म के पहले भाग को देखके ही फिल्म के पैसे वसूल हो जाते है. इस फिल्म के मैं दो रिव्यू देना चाहूँगा एक कहानी के पहले भाग के बारे मे ओर दूसरा कहानी के दूसरे भाग के बारे मे. तो बात करते है कहानी के पहले भाग की-
1. पहला भाग इतना जबरदस्त है की शायद इससे बेहतर ओर कोई हिन्दी फिल्ममेकर बना ही नही सकता था. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर एक्टिंग तक हर जगह पूरी टीम का हार्ड वर्क दिखता है. फिल्म मे जो कोइंसिडेंट्स बनाए गये है वो जबरदस्त है, कैसे हिंदू महिला के लिए सफेद वस्त्र का मतलब पती की मौत से है लेकिन वही क्रिस्चियन के लिए ये शादी की पोशाक है, गाँधीजी की वॅल्यू लोग सिर्फ़ पैसो के नोट पे ही करते है, सेल्फ़ डिफेन्स आइडिया ओर ऐसे बहुत सारे रिलिजन ओर आम लोगो की विचित्र सोच पे सीन्स फिल्माए गये है जो लाजवाब है. जो एलीयन का इस दुनिया मे आके इस दुनिया को धीरे-धीरे जानने का पार्ट बनाया गया है(आमिर ये फ्लॅश बॅक अनुष्का को सुना रहा है) ये भाग इस फिल्म का सबसे मजबूत ओर बहुत ही मज़ेदार भाग है. इस भाग मे सिचुयेशनल कॉमेडी ऐसे बनाई गयी है की सामने वाले को देखते ही हॅसना जाए. दूसरी बेकार फ़िल्मो ओर इस फिल्म मे ये ही बड़ा डिफरेन्स है की दूसरी फ़िल्मो मे लोगो को ज़बरदस्ती हसाने का प्रयास किया जाता है लेकिन इस फिल्म मे ऐसा बिल्कुल भी नही है. सिचुयेशन्स ही ऐसी पैदा की गयी है की हसना आए ओर इस तरीके की कॉमेडी बनाना शायद बहुत-बहुत मुश्किल काम है. इसकी कॉमेडी को देख कर मुझे पहली हेरा-फेरी फिल्म की याद गयी, उस फिल्म मे भी सिचुयेशनल कॉमेडी पैदा की गयी थी ओर परेश रावल की एक्टिंग जबरदस्त थी, इस फिल्म मे भी सिचुयेशन ऐसी ही जबरदस्त बनाई गयी है की लोगो को सिचुयेशन देखके ही हसना जाए ओर आमिर ख़ान की एक्टिंग भी लाजवाब है. पहले भाग की जो पटकथा लिखी गयी है वो उम्दा है ओर इस पे बहुत मेहनत की गयी है, आमिर ख़ान की एक्टिंग लाजवाब है. राजू हिरानी का डाइरेकशन भी अच्छा है. बस कही-कही सॉंग के आस-पास फिल्म थोड़ी आर्टिफिशियल ड्रामा दिखने लगती है. फिल्म के पहले भाग का कॉन्सेप्ट भी अच्छा है की एक ऐसा इंसान जो दूसरी दुनिया से आया है उसे यहा लोगो का सोचने का तरीका कैसे अजीब लगता है ओर ये भी खूबसूरती से दिखाया गया है की उसे अजीब लगता है जब हम एक दूसरे को बोलकर अपनी भावनाए व्यक्त करते है ओर वो भी झूठी जबकि इनकी दुनिया मे लोग बात ही नही करते, झूठ बोलना तो दूर की बात है ये एक दूसरे से बात करके नही बस हाथ पकड़ के बात समझते है. ओवरऑल फिल्म का पहला भाग जबरदस्त है, लॉजिक का अच्छा इस्तेमाल किया गया है, फिल्म बिना रुके चलती रहती है ओर जबरदस्त मनोरंजन करती रहती है.
2. अब आते है कहानी के दूसरे भाग पर तो इस फिल्म के दूसरे भाग को देख कर बिल्कुल नही लगता की इसके दूसरे भाग की कहानी उसने ही लिखी है जिसने पहले भाग को लिखा है. फिल्म लॉजिक को किनारे करने लगती है, फिल्म लंबी खिचने लगती है ओर पूरी तरह से भटक जाती है. शायद कुछ ज़्यादा मेसेज देने के चक्कर मे कहानी की पूरी खिचड़ी बन गयी है. वो शुरू कहा हुई थी ओर कौनसी दिशा ले ली. फिल्म का दूसरा भाग देख कर बहुत अफ़सोस होता है,शायद दूसरे भाग तक पहुचते-पहुचते उनको इस फिल्म को बनाने का क्रेज़ कम हो गया होआमिर ख़ान की एक्टिंग के अलावा दूसरे भाग मे ऐसा कुछ ओर बेहतर देखने को नही है. टीवी एंकर रिपोर्टिंग, बाबा से बहस, बॉम्ब ब्लास्ट ओर कई ऐसे सीन्स बहुत ही बचकाने है, जो कहानी को कोई नयी दिशा नही देते. यकीन नही होता की ये दूसरा पार्ट राजू हिरानी ओर आमिर ख़ान ने ही बनाया है जो अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है,वैसे कुछ सीन्स ओर थोड़े लॉजिकल एग्ज़ांप्ल अच्छे है पर उस लेवल के नही है जैसे सीन्स फर्स्ट पार्ट मे है. शायद आमिर ख़ान को सुपर इंटेलिजेंट दिखाने के चक्कर मे स्टोरी पटरी से उतर गयी. कहानी को अगर कोई ओर दिलचस्प नयी दिशा मे मोड़ा जाता तो बेहतर होता. लेकिन फिर भी मैं इस फिल्म के पहले भाग से ही इतना इंप्रेस्ड हूँ ओर इतना एंटरटेनमेंट हुआ है की अगर फिल्म का दूसरा भाग बेकार था तो भी उससे कुछ ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा ओर मेरे पैसे वसूल हो गये, बट आमिर ओर राज कुमार हिरानी को आगे ध्यान रखना चाहिए ओर ओवरकॉन्फिडेन्स से बचना चाहिए. आप अपने लॉजिकल आइडियास के लिए जाने जाते है जो नाच गाने ओर उछल कूद की बजाए फिल्म की कहानी पे फोकस करते है ओर दूसरे पार्ट मे फिल्म जिस तरह से बिखरी है वो बहुत ज़्यादा निराश करती है. Hope they will not repeat their mistakes again and will see both(aamir and rajkumar hirani) super hit jodi once again soon with brilliant different concept. Thanx :)