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Tuesday, 21 May 2013

TRUTH BEHIND LBT AGITATION IN MAHARASHTRA, MAHARASHTRA ME LBT ANDOLAN KA KALA SACH, महाराष्ट्र के एल.बी.टी आंदोलन का काला सच

महाराष्ट्र के एल.बी.टी आंदोलन का काला सच- क्या गेम खेला कॉंग्रेस सरकार ने, पूरा मैच ही फिक्स कर डाला हमारे शरद पवार साहब ने. आज पहली बार मुझे ये अहसास हुआ है की एक आम इंसान की इस देश मे क्या हेसियत है. मैने हर दरवाजे पर आवाज़ लगाई चाहे वो नॅशनल मीडीया हो, ओपोजीसन पार्टी हो, मिनिस्ट्री हो या ब्यूरक्रॅट्स हो. एक बात आज अच्छी तरह से समझ मे आ गयी की ये देश डेमॉक्रेटिक देश नही है पर डेमॉक्रेटिक होने के नाम पर एक बहुत बड़ा धब्बा है. यहा जिस तरह ईमान बिकता है उसपर शायद इंसानियत भी शर्मसार हो जाए. यहा मरता हमेशा आम इंसान ही है. आम छोटे-छोटे ट्रेडर्स को 30 दिन बंद करके क्या मिला? हिन्दी मे एक कहावत है की- माल खाए मदारी ओर मार खाए बंदरिया . छोटे व्यापारी एक महीने की हड़ताल रख कर बंद करते है फिर सरकार की तरफ से एक रेप्रेज़ेंटेटिव आता है वो उनके लीडर को अलग कमरे मे ले जाकर गुप्त बाते करता है फिर बाद मे ये फेसला लिया जाता है की सरकार मान नही रही हम 1-2 माँग कम करके समझोता कर देते है. आंदोलन की जो खास बात होती है उसको नही माना जाता पर जो छोटी छोटी बात होती है उनको मान लिया जाता है बाद मे मीडीया मे दिखाया जाता है की सरकार ने व्यापारियो की लगभग सभी बाते मान ली है ओर व्यापारियो की जीत हुई है वास्तविकता क्या है इसे पूरी तरह से छुपाया जाता है. आम लोगो को इससे मतलब नही है की वास्तविकता क्या है बस टीवी पे न्यूज़ चेनल ने दिखा दिया हम जीत गये तो बस हम जीत गये ज़्यादा डीप मे जाने की ज़रूरत नही है. आम लोग दिमाक का ज़्यादा इस्तेमाल करने मे यकीन नही करते बिचारे क्या करे इनको सरकार ने इतना उलझा के रखा है की इनको घर,दफ़्तर ओर अपना छोटा परिवार इससे ज़्यादा सोचने की फ़ुर्सत ही नही है. देश की कौन सोचे उसे सोचने के लिए तो हमारे पॉलिटिशियन्स और हमारी मीडीया है ना हम तो बस बॉलीवुड के हीरो ओर हीरोइन के बारे मे सोचेंगे की वो कैसे नाचते है ओर क्या पहनते है. अक्सर छोटे व्यापारियो ओर ट्रेडर्स के कंधो पर बंदूक रखकर बहुत बड़ा गेम खेला जाता है.यही इस देश की परंपरा है,यही इस देश की डर्ट्री पॉलिटिक्स है. और वाह रे आम जनता वो तो 10 रूपये का टूतपेस्ट भी 100 रुपये मे लेकर के आती है क्यू की वो टीवी पर देखती है की कैसे उसको दातो पर लगाने पर दात चमकने लगते है ओर लड़किया पीछे पड़ जाती है. कभी कभी हँसी आती है तो कभी कभी बहुत दुख होता है की क्या हमारे देश की जनता को मूरख बनाना इतना आसान है? वैसे तो इस देश की जनता एक एक रुपये मे कंजूसी करती है पर 5 रुपये के नींबू पानी की जगह 50 रुपये का लेमन फ्लेवर का कोल्ड ड्रिंक पीने को ज़्यादा पसंद करती है क्यूकी उसने वो टीवी पर देखा है की कैसे कोल्ड ड्रिंक पीकर हीरो एकदम तूफ़ानी बन जाता है. सच देखे तो जितना 5 रुपये का नींबू पानी हेल्दि होता है उतना कोल्ड ड्रिंक भी नही होता वो तो उल्टा नुकसान करता है पर क्या करे हमने टीवी पर देखा  है ओर टीवी पर ग़लत थोड़े ही बताते है. मीडीया मे अक्सर खबर देख कर झट से हम यकीन कर देते है की ये तो महान इंसान है, ये तो देश के भले के लिए सोचता है पर सच्चाई तो कुछ ओर ही होती है वो तो पैसा फेक कर मीडीया मे अपनी तारीफे करवाता है. जो बिचारे सही लोग है वो तो आगे ही नही आ पाते क्यूकी उनके पास तो करप्ट पॉलिटीशियन जीतने पैसे ही नही है,उसने तो जिंदगी भर लोगो की सेवा ही की है इसलिए बिचारे को पैसा इक्कठ्ता करने का मौका ही नही मिल पाया.मौका मिला तो भी उसे सही तरीके से भूना नही पाया क्यूकी उसके लिए तो देश ही सर्वोप्रिय था. आज टीवी पर, मीडीया मे जो भी नेता दिखता है कोई ईमानदार नही है,अगर ईमानदार होता तो वो टीवी पर आ ही नही पाता. टीवी पर ओर मीडीया मे आने के लिए भी इनको करोड़ो अरबो रुपये की बोली लगानी पड़ती है तब कही जाके हमारी ईमानदार मीडीया उसकी तारीफ करती है. हम इस देश मे बस कीड़े मकोड़ो की तरह है. जिस तरह हमारे घर मे कीड़े मकोडे बढ़ जाए तो हम उसकी सफाई करते है, हमारी सरकार को लगता है की आम लोग भी कीड़े मकोड़ो की तरह बहुत बढ़ गये है चलो आज घर को सॉफ किया जाए. फिर ऐसे नियम बनाए जाते है जिससे छोटे-छोटे आम लोगो के धंधे बंद हो जाए ओर उनके पास बचे हुए माल को भी लूट लिया जाए,क्योकि उसके साथ तो कोई हे ही नही. जिस तरह से हम घरो मे मच्छरो को मारने के लिए स्प्रे का यूज करते है वैसे ही ये नये नियम बनाकर उसे स्प्रे की तरह यूज करते है. ये हम जैसे छोटे छोटे ट्रेडर को आम लोगो मे ये दिखाना चाहते है की हम जन विरोधी है, लोगो को परेशान करने मे हमे मज़ा आता है, मीडीया भी सरकार के सुर मे सुर मिलकर लोगो मे ये दिखाने की कोशिश करती है की आम ट्रेडर चोर है, इसको टेक्स नही भरना है, ये सरकार की शराफ़त का ग़लत फ़ायदा उठाते है ओर हड़ताल कर आम लोगो को परेशन करते है. आम लोग इस बात पर यकीन कर हमे गालिया देते है हमे कोसने लगते है, सचाई क्या है ये आम लोगो को भी नही पता पर टीवी पे देखा है, मीडीया ने दिखाया है तो सच ही होगा. आम लोगो से एक छोटा सवाल- हमारी सरकार ने जो नये नियम बनाए है उसके खिलाफ कोई बड़ा शॉपिंग माल या कोई मल्टिनॅशनल कंपनी ने तो हड़ताल नही की फिर आम छोटे-छोटे ट्रेडर्स ने क्यू हड़ताल की? 150000 लोगो पर लाठी चार्ज होता है ओर लगभग 31000 ट्रेडर्स को जैल मे डाला जाता है मीडीया वो नही दिखाती ओर संजय दत्त जैल जा रहा है उसपर पूरे दिन आसू बहाती है, मीडीया भी क्या करे बिचारी उसने भी पैसा खाया है सरकार से एलबीटी आंदोलन पर न्यूज़ नही बताने का. वास्तविकता आम लोगो से छुपा दी जाती है पर वास्तविकता ये है की आम लोग नही जानते की वो ओर हम सब एक ही नाव मे सवार है, अगर हम डूबेंगे तो सब साथ मे डूबेंगे. हम ओर तुम दोनो एक ही है बस यहा तो गेम खेला जा रहा है की फूट डालो ओर राज करो. सरकार अपने प्यादो का बड़ी अच्छी तरह से इस्तेमाल करती है आम लोगो पर की आम लोगो को आम लोग ही दुश्मन नज़र आने लगते है. एलबीटी ओर ओकटरोई पूरे भारत मे कही नही है ये सिर्फ़ महाराष्ट्रा मे ही लगाया गया है,सिर्फ़ महाराष्ट्रा मे क्यू लगाई गयी है, पता नही? सरकार को पैसा चाहिए इस लिए लगा दी डेवेलपमेंट का बहाना करके. सरकार लोगो मे ये बताने की कोशिश करती है की छोटे छोटे आम व्यापारी बहुत बड़े चोर है,बड़े बड़े घोटाले करते है,इनको टेक्स नही भरना,हमने क़ानून लाया है उससे ज़्यादा ट्रॅन्स्परेन्सी आएगी. सच क्या है वो आम जनता को भी पता नही. एक मज़े की बात बताता हू सरकार जब भी टेक्स लाती है उसका तोड़ भी सरकारी बाबू ही देते है वोहि व्यापारियो को ग़लत रास्ता बताते है की आप मेरी थोड़ी जेब गरम करो और आप ऐसे नही वैसे करो ताकि आपको इतना पैसा देना नही पड़ेगा. हमारा टेक्स सिस्टम उपर से नीचे तक भ्रस्त हो चुका है,यहा नियम ट्रॅन्स्परेन्सी के लिए नही ज़्यादा जेब गरम करने के लिए बनता है. दूसरे तरक्कीशील देश जैसे सिंगापुर मे आप देखो तो वहा सिर्फ़ एक टेक्स जीएसटी ही है वो भी सिर्फ़ 7% ओर विदेशी लोग अगर वहा खरीदी करे तो उनके लिए 2% ही है,उन्हे एयरपोर्ट पर रिफंड दिया जाता है. हमारे देश मे सरकार जानबुझ कर ज़्यादा टेक्स रखती है ताकि कोई इंसान ईमानदारी से टेक्स ना भर सके ओर नेताओ से लेकर उनके चम्चे ओर सरकारी बाबुओ तक की जेबे गरम होती रहे. वो आम हिन्दुस्तानी को ईमानदार नही बेईमान बनाना चाहते है. इतिहास गवाह है की आम इंसान कभी आज़ादी की सांस ही नही ले पाया,वो हमेशा घुट घुट के मरा है. पहले वो निर्दय राजाओ के अधीन था फिर मुगलो के बाद मे अंग्रेज़ो के ओर अभी नेताओ के. इस देश मे आम इंसान अपना दिमाक नही चला सकता है अगर नेता कहे दुकान बंद करो तो दुकान बंद करनी पड़ेगी अगर उसने कहा खोलो तो खोलनी पड़ेगी वो कहेंगे तुम हिंदू हो मुसलमानो से नफ़रत करो ओर मुसलमानो से कहेंगे तुम हिन्दुओ से नफ़रत करो तो आम लोगो को वो करना ही पड़ेगा, नही तो चैन से जीने नही दिया जाएगा. इस देश की राजनीति हमेशा से फुट डालो और राज करो पर ही आश्रित रही है. ये है हमारा भारत ओर इसको हम कहते है डेमॉक्रेसी. वेल डन. शाबाश मेरे देश के नेताओ ओर शाबाश मेरे देश की बिकी हुई मीडीया. जय हिंद.


Monday, 6 May 2013

STRIKE IN MAHARASHTRA AGAINST LBT (LOCAL BODY TAX)


Traders in Maharashtra is shutting shops against LBT(Local Body Tax). i think shutting shops will not impact on corrupt government. we must block roads & disturb the route of minister's car. Let the police come & strike with sticks on our forehead, but we will not take our steps back. There must be bloodbath to hear our voice throughout the country. Only closing shops & writing on facebook and social media will not find any solution. We need a permanent solution even if you close your shop for 365 days, then too government will not awake as the government have many sources of income. Frightening common innocent people to shut their Shop for infinite time will not give any solution. If we want to eradicate the problem, then we must catch the problem from root. Ask the government increasing taxes will not increase Revenue as the heavy-duty always invite to heavy corruption. If you increase tax, then only few people will pay tax honestly & most people will give bribe to avoid Pay heavy tax. If you see Singapore it is about half size of mumbai, but this country is ranking 3 in top Richest countries list for 2013 according to highest per capital income basis Read More at richestman2013.com/top-10-richest-countries-in-the-world. & amazing fact about Singapore that there are no other tax except GST that is about 7% & even low for tourist about 2% (giving 5% refund on airport). This country has strongest economy only imposing 7% tax on their people & amusingly the Indian government that imposed 100 kinds of taxes on common people, but still find fund problem to run the governance smoothly. The fact is that Indian government not want to make Indian public honest because if the public will honest, then how will the politician will make money? The Indian politicians want to corrupt common people so that no one can raise voice against the corrupt politicians. Increase taxes will not increase revenue, but it will invite more corruption.



Sunday, 30 December 2012

मूर्खो का मुर्खशास्त्र - Murkho Ka Murkhshastra, A tale about some Dumb, Deaf & Blind people of bhinmal jain society written by azad jain.


मूर्खो का मुर्खशास्त्र.
  (निर्देश- ये लेख किसी व्यक्ति विशेष पर नही लिखा गया है, हमारे अधिकांश रिश्तेदार बेहद सालिन और नम्र है. इस लेख मे तो बस 2-3 लोगो पर व्य्गयात्मक कटाहास किया गया है जो अपने आप को इस दुनिया का सबसे चालाक ओर समझदार इंसान मानते है पर चालाक ओर समझदार लोगो जैसा काम नही करते. उनकी सोच द्वारा आजके हमारे समाज पर व्यंग्य किया गया है. इस लेख का उद्देश्य किसी की भावनाओ को आहत करना नही है या किसी वयक्ति विशेष को निशाना बनाना नही है, इस लेख का उद्देश्य सच्चाई ओर ईमानदारी से आज के लोगो की सोच उजागर करना है. इस लेख का उद्देश्य हमारे समाज के खोखलेपन को उजागर करना है. ये लेख हमारे समाज मे जुड़ी कुछ बुराइयो पर से परदा उठाने के लिए लिखा गया है. ये लेख समाज के हर वर्ग की सोच पर लिखा गया है. जिस तरह आमिर ख़ान की मूवी “तारे ज़मीन पर” ने माता पिता का बच्चो के प्रति सोचने का नजरिया बदल दिया, उसी तरह ये लेख भी आपके, आम लोगो को देखने ओर सोचने के नज़रिए को बदल देगा. आज समाज मे लोगो मे प्यार कम ओर दिखावटपन ज़्यादा रह गया है. ये लेख हमारी उसी सोच पर प्रहार करेगा, इस लेख को वयंग्यात्मक ओर गंभीर मुद्दो को एक दूसरे मे पिरोकर बेहद सालीनता से तैयार करने का प्रयास किया गया है. ये लेख आपको किसी सवाल का जवाब नही देगा अपितु ये आपसे सवाल करेगा, ऐसे सवाल जो आपको एक बेहतर इंसान की तरह सोचने को मजबूर कर देंगे. मेरी तरफ से एक छोटी सी कोशिश मेरे इस समाज को बदलने की, मै अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा आप को ये लेख पसंद आए और सच्चाई ओर ईमानदारी से आज के समाज की सही तस्वीर पेश हो सके. आशा है आपको ये लेख पसंद आएगा, धन्यवाद). नमस्कार देविओ और महापुरुषो, मुझसे अक्सर लोग गुज़ारिश करते है की मै हिन्दी मे लिखू ताकि मेरी बाते ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुच सके. इस बार मेरी छोटी सी कोशिश हिन्दी मे लिखने की. जैसा आप लोगो को विदित है की हमारा परिवार एक ओर समारोह की तैयरिया कर रहा है. में भी बहुत खुश हू जैसे हर कोई होता है लेकिन उसी समय दिल मे थोड़ी उदासी भी छा जाती है. दिल से एक आवाज़ आती है तू इतना क्यू खुश हो रहा है, तू बेगानी शादी मे अब्दुल्लाह की तरह दीवाना क्यू हो रहा है? मुझे लगता है मेरी अंतरात्मा जो कहती है वो ग़लत भी नही है. मै तकरीबन 27 सालो से जो देख रहा हू उसे झुठला भी तो नही सकता. अक्सर लोग समारोह रखते है ताकि पूरा परिवार एक साथ मिले, जो भी गीले-शिकवे है उनको दूर कर परिवार ओर पास आए पर हमारे परिवार के कुछ लोग समारोह रखते है ताकि अपने पैसो का रोब परिवार मे दिखा सके ओर वहा अपने से छोटे ओर कमजोर लोगो को निशाना बना सके, उन्हे जलील कर सके ओर अपने आप को आम परिवार से ऊपर बता सके. हमारे लोग अक्सर दूरिया मिटाने के लिए नही बल्कि दूरिया बढाने के लिए समारोह रखते है. अक्सर ग़रीब ओर कमजोर लोगो को उनकी हेसियत बताई जाती है.हमारे कुछ लोगो की ये सोच है की अगर अपने आप को बड़ा बताना है तो सामने वाले को नीचे गिराओ हम अपने आप ऊपर दिखने लगेंगे. इन्हे बेहद गुस्सा आता है जब इनके कम पैसे वाले रिश्तेदार इनके समारोह मे ज़्यादा आते है. ये चाहते है की इनके समारोह मे ज़्यादा से ज़्यादा पैसे वाले लोग आए. मुझ जैसे कम पैसे वाले ओर कमजोर वर्ग के लोगो का आना ये पसंद नही करते. आपको ये सुन कर अचंभा होगा की उनकी मेहमानो की लिस्ट मे कई पारिवारिक नाम गायब होंगे ओर सबसे बड़ी हास्यास्पद बात, उनकी मुख्य अतिथियो की लिस्ट में कई मोची ओर मोचनो के नाम होंगे लेकिन अपने घर के कई नामो को काट दिया गया होगा. चलो एक बात तो अच्छी है की वो कम से कम ग़रीब तबके के मोचिओ को तो बुलाते है चाहे इसमे इनका स्वार्थ ही क्यो ना छुपा हो. ये मोचियो को अपना रुतबा दिखाकर उनसे सस्ते दामो पर ज़मीन खरीदते है. मुझे इस बात का गम नही है की उनको मोची ओर मोचनो से इतनी मोहब्बत क्यू है ओर मुझसे इतनी नफ़रत? पर इस बात की दिल मे एक कसक ज़रूर है की क्या आज दुनिया मे पैसा ही हमारा रिश्तेदार हो गया है? क्या पैसा रिश्ते नातो से ऊपर उठ गया है? क्या पैसो ने हमे "लाइसेन्स" दे दिया की हम किसी भी ग़रीब, छोटे या कमजोर इंसान को जब मर्ज़ी आए नीचे दिखाए, उन्हे अपमानित करे? क्या पैसो की ताक़त ने हमे अँधा बना दिया है?मुझे लगता है जब पैसा इंसान के पास आता है तो वो ताक़त और अंधेपन की बीमारी साथ लेकर आता है. आख का अंधापन नही ये है दिमाग़ का अंधापन. कई लोग इस बीमारी से अपने आप को बचा लेते है लेकिन कुछ लोग इस बीमारी मे खो जाते है. पैसो की ताक़त मे ऐसा नशा है की इंसान जो करता है उसे वो सही लगने लगता है ओर उसके खिलाफ बोलने वाले को वो कुचल देना चाहता है. वो मानसिकरूप से इतना अँधा हो जाता है की उसे न्याय ओर अन्याय मे फरक ही नही दिखता. जिस तरफ पैसा है वो उसी तरफ चल देता है चाहे वो रास्ता ग़लत ही क्यू ना हो. इनके आस पास रहने वाले लोगो की इतनी हिम्मत भी नही होती की इनको सच्चाई से अवगत करा सके. इनके खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को ये बेदर्दी से कुचल देते है. इनके खिलाफ बोलने की हिम्मत कौन करेगा? ये कमजोर ओर ग़रीब लोगो को अपने पैरो तले दबाके रखते है ओर अमीरो के पैरो तले खुद बैठ जाते है,उनकी जी-हजूरी करते है. आप ही बताइए इनके खिलाफ बोलेगा तो कौन? हमारे लोग कमजोर ओर ग़रीब लोगो को सीढ़ी के पायदान की तरह समझते है वो इनको जितना पैरो से नीचे कुचलेंगे ये उतने ही ऊपर चड़ेंगे, चाहे वो इनके घर के लोग ही क्यू ना हो. ये महिलाओ पर भी ज़ुल्म करने से नही चूकते. हमारे परिवार के सबसे चालाक सदस्य ने अपनी पहली बहू को घर से बाहर इसलिए निकाल दिया क्योकि वो इनके घर की कामवाली बाई की तरह ज़्यादा काम नही कर सकती थी.इन्होने अपनी दूसरी बहू को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया क्योकि उन्हे लग रहा था की इसके शरीर मे सकीना और मदीना नामक चुड़ेलो ने प्रवेश कर दिया है ओर भूत भगाने के लिए इन्होने अपनी बहू को बहुत यातनाए दी और वो भी उस समय जब वो गर्भवती थी. वैसे अगर इनको कभी छींक भी आ जाए तो ये पहले 5 स्टार हॉस्पिटल लीलावती भागते है ओर दूसरी तरफ अगर इनकी बहू बीमार हो तो ये किसी डॉक्टर की बजाय भोपे को दिखाने मे ज़्यादा विश्वास रखते है. मेरा सवाल हर बुद्धिजीवी इंसान से क्या ये न्यायसंगत है? आप लोगो से एक सीधा सवाल, अपने आप को दुनिया का सबसे बड़ा चालक ओर समझदार इंसान कहने वाले की क्या ऐसी सोच हो सकती है? क्या समझदार इंसान ऐसा सोचते है? अपनी बहुओ के काम का कामवाली बाई से तुलना करना सही है? जो इंसान ये सोच के इनके घर मे अपनी बेटी देता है की ये मेरी बेटी को ढेर सारी खुशिया ओर प्यार देंगे उनको ग़लत साबित करना क्या ये चालाकी है? मुझे लगता है पैसो का भूत उतारने के लिए भोपे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत इनको है. क्या आज पैसो के अहंकार ने हमे इतना चेतनाशून्य कर दिया की हमे महिला ओर कमजोर ग़रीब लोगो का दर्द भी समझ मे नही आता? हर लड़की अपने दिल मे एक हसीन ख्वाब संजोती है की उसकी शादी एक ऐसे घर मे हो जहा उसे इतनी खुशिया,प्यार ओर इज़्ज़त मिले जितनी उसको अपने पिता के घर मे भी नही मिली हो. आप बताइए उस लड़की के दिल पे क्या गुजरती होगी जब उसके ख्वाबो को चकनाचूर कर दिया जाए. ये अपनी बेटी से बहुत प्यार करते है ओर चाहते है की इनकी बेटी ससुराल मे राजकुमारी की तरह रहे बड़ा सवाल ये है की तो ये दूसरो की बेटी जो इनके घर मे बहू बनके आती है उसे क्यू अपमानित करते है? उसे क्यू राजकुमारी की तरह नही रखते ओर क्यू उसकी तुलना कामवाली बाई से करते है? आख़िर क्यू ये शादी के बाद 1 साल तक तो अपनी बहू को राजकुमारी की तरह रखते है फिर उसे घर की कामवाली बाई का दर्जा देते है? ये अपने बेटे की शादी करने से पहले लड़की ढूँढने के लिए जीतने “क्रेज़ी” हो जाते है उतने “क्रेज़ी” ये बहू घर मे आने के बाद क्यू नही होते? मुझे याद है ये अपने बेटे को ऊचा बताने के लिए अक्सर मुझे नीचे दिखाने की कोशिश करते थे. इनकी ये धारणा है की अगर अपनी लाइन को बड़ा बताना है तो सामने वाले की लाइन छोटी कर दो, हम अपने आप बड़े दिखने लगेंगे. कही आपने भी ये सवाल पढ़ा होगा की अगर एक लाइन खीची हो तो उसे बिना काट छाट के बड़ा कैसे बनाया जाए तो सामने वाले का जवाब होता था की उस लाइन के नीचे एक छोटी लाइन खिच दो उपरवाली लाइन अपने आप बड़ी लगने लगेगी. मुझे ये अक्सर लोगो मे अपने बेटे की तुलना मे ज़्यादा बदसूरत, पागल ओर नासमझ दिखाते थे. मुझे जी भर कर जलील किया जाता था. मुझे घर घर जाके पागल ओर इनके बेटे को ज़्यादा समझदार ओर होनहार बताने की कोशिश करते थे. में आज भी सोचता हू की ऐसी धूर्तता, कपट ओर तिकड़मबाज़ी करने से भी इनको क्या मिला? क्या ऐसा करने से इनको स्वर्ग की अप्सराये मिल गयी? ओर में तो कहता हू की सच मे अगर इनको स्वर्ग की अप्सराये मिल गयी तो भी इन्होने क्या किया? इन्होने तो स्वर्ग की अप्सराओ को भी अपने घर मे लाकर उन्हे घर की “काम वाली बाई” बना दिया. घर का काम करना ग़लत नही है, अपने घर-परिवार को संभालना तो हर महिला का कर्तव्य होता है पर उसके काम की तुलना घर की नोकरानी से करना कहा तक सही है? हम अक्सर अपनी बहुओ को लंबे-लंबे घूँघट निकलवा कर बड़े गर्व से कहते है की हम भारतीय संस्कृति के रक्षक है.हम अपने अधिकारों का तो बहुत अच्छा इस्तेमाल करते है पर अपने कर्तव्यो से मुह फेर लेते है. अगर लंबे घूँघट निकालना हमारी भारतीय परंपरा है तो हमारी मोरखिया परंपरा ये भी कहती है की घर की बहू लक्ष्मी का रूप होती है. हम क्यू अपनी बहू को जो हमारे घर मे लक्ष्मी के रूप मे आती है उसे घर की कामवाली बाई का दर्जा देते है? ओर अगर वो कभी हमारे खिलाफ बोले तो हम लोगो मे ये हल्ला करने लगते है की इसमे 15-20 चुड़ेले एक साथ मे घुस गयी है. हम क्यू बहुओ का सम्मान नही कर सकते? महिला सम्मान की भूकी होती है, वो रूखा सूखा खाकर और झोपड़ी मे रहकर भी खुश रह सकती है अगर उसे वहा सम्मान मिले वही अगर हम उसका सम्मान ना करके उसे महलों मे रखे तो वो भी उसे काटने दोडेगा. अगर इतने पैसे होते हुए भी हम अपने घर की महिलाओ को सम्मान ना दे सके तो ये पैसे किस काम के? ये पैसे तो व्यर्थ है.मुझे लगता है एक मजबूत रिश्ते की शुरुआत झूठेपन ओर मक्कारी से नही हो सकती. अगर हम रिश्ते की नीव ही झूठे वादे और खोखले दिखावो से तैयार करेंगे तो रिश्ते ज़्यादा दिन नही चल सकते कुछ सालो के बाद उनमे दरार आ जाएगी. मुझे आज भी इसबात का अफ़सोस नही है की इनके फायदे के लिए मुझे क्यू नीचे दिखाया गया. हो सकता है मै पागल हू ओर इनके जितना चालाक और धूर्त नही हू पर तुलना करके किसीको नीचे बताना सही नही है. आप सचिन ओर मुकेश अंबानी की तुलना नही कर सकते या अमिताभ ओर महाबली खली की तुलना नही कर सकते, ये चारो अपने क्षेत्र मे बेहतरीन है. हम किसीकि तुलना करके उसे छोटा बड़ा नही बता सकते. ऊपरवाले ने हर इंसान को कुछ ख़ास बनाया है, जिस तरह इंसानो के चेहरे अलग होते है उसी तरह हर इंसान के पास कुछ अलग ओर खास तरह की प्रतिभा होती है. मै तो ये सोचता हू की अगर मेरे भाइयो को फायदा हो तो मे 100 बार भी अपमानित होने के लिए तैयार हू पर एक बड़ा सवाल ये है की इससे मेरे भाइयो को क्या हासिल होगा? वो ऐसा कर एक कदम ऊपर नही बल्कि नीचे जाएँगे. किसी को गिराकर हम खुद कभी ऊपर नही उठ सकते. आज आपके पापा पैसा फेक कर आपके लिए डॉक्टर की एम.बी.बी.एस. ओर एम.एस. की डिग्री ला सकते है पर क्या आप उस जूठी डिग्री से किसीका ऑपरेशन कर सकते है? जब तक हम हमारी प्रतिभा नही बढ़ाएँगे, डॉक्टर की पढ़ाई नही करेंगे तब तक जूठी शान भी व्यर्थ है. पैसो की ताक़त के बल पर खरीदी हुई प्रतिभा आपको लोगो मे एक ऊचा स्थान तो दिला देगी लेकिन वो आपकी प्रतिभा नही बड़ा पाएगी, वो तो आपकी मेहनत ओर काम के प्रति सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से ही अर्जित की जा सकती है. कहते है लक्ष्मी बड़ी चंचल होती है कही टिकती नही ओर सरस्वती एक बार आए तो जाती नही. पैसा आप से छीन सकता है लेकिन आपकी प्रतिभा आपसे कोई नही छीन सकता. अगर बढ़ाना ही है तो अपनी प्रतिभा बढाओ, अपने अहंकार ओर दिखावटपन को नही. अपने बेटे को लोगो मे “प्रमोट” करना ग़लत नही है वो तो हर मा-बाप का कर्तव्य है पर अपने पैसो की ताक़त के बल पर घर के लोगो को नीचे दिखाकर ओर उन्हे अपमानित कर अपने बेटे को ऊचा दिखाना ग़लत है, कोई भी सभ्य इंसान इसे सही नही कहेगा. आज ये देखकर बहुत दुख होता है की मेरे पापा ने जिनके लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी आज वो ही लोग हमे आखे दिखाते है, हमे धमकाते है ओर अपमानित करते है. मेरे पापा का बचपन बहुत दुखमय हालत मे गुजरा. मेरे पापा के 2 भाई ओर 3 बहने थी. मेरे दादा पर बहुत सारा कर्ज़ था और वो शहर मे नोकरी करते थे. मेरे पापा घर की माली हालत देखकर बेहद दुखी थे ओर उनका एक ही सपना था की मेरे पापा का कर्ज़ उतारना है ओर अपने भाई बहनो की शादी करवानी है. उनकी लगभग पूरी उम्र कर्ज़ उतारने और अपने बहन भाइयो की शादी करवाने मे गुजर गयी. कहते है जिंदगी मे हर इंसान का एक सबसे बेहतर समय आता है जिसमे वो अपनी जिंदगी के सबसे ज़्यादा पैसे कमाता है. मेरे पापा ने उस बेहतर समय मे अपने लिए पूंजी नही जोड़ी उन्होने उसे अपने पापा का कर्ज़ा उतारने ओर बहन भाइयो की शादी मे लगा दिया. आज भी एक किस्सा याद कर दिल सिहर जाता है, मेरे पापा की एक बहन अंधी थी ओर उनकी शादी मे बहुत दिक्कत आ रही थी, मेरे पापा अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे ओर चाहते थे की कैसे भी इसकी शादी हो ओर घर ग्रहस्थी बनाके सुख पूर्वक रहे पर एक बड़ी दिक्कत आ रही थी की लड़केवाले पैसे ज़्यादा माँग रहे थे.मेरे पापा ने बहुत कोशिश की पैसा इकट्ठा करने की पर वो सब कम पड़ रहे थे. थक हार कर वो अपने मालिक के पास गये ओर अपने सेठ से हाथ जोड़ के विनती की मुझे थोड़े पैसो की ज़रूरत है, मेरी अंधी बहन की शादी के लिए मुझे थोड़े पैसे चाहिए ओर इसके लिए मे आजीवन आपकी गुलामी करने के लिए तैयार हू. मै आजीवन आपका बंधुआ मजदूर बनकर रहूँगा. उनके सेठ जो उनसे बेहद प्यार करते थे उन्होने उनको गले से लगा लिया ओर कहा- अमरचंद,क्यू इतना परेशान हो रहा है तू नही जानता तेरी कीमत क्या है. तू करोड़ो मे एक है, तू एक नायाब हीरा है. मेरे पापा ने अपने घर की खुशहाली के लिये और बहन भाइयो के लिए अपने आप को बंधुआ मजदूर बनाने तक को तैयार हो गये थे. मेरे पिता का जब अच्छा टाइम था तो उन्होने अपना सारा पैसा अपने पिताजी का कर्ज़ उतारने ओर बहनो भाइयो की खुशहाली मे लगा दिया. उन्होने अपनी दुकाने,अपना घर तक बेच दिया. उन्होने अपनी पत्नी ओर अपने बच्चो से ज़्यादा अपने पिता ओर भाई बहनो को तरहीज दी ओर जब उनके भाइयो का टाइम अच्छा आया तो उन्होने अपने परिवार ओर उनके बीवी बच्चो को तरहीज दी. हम बहुत पीछे रह गये क्योकि हमारे बारे मे तो किसी ने सोचा ही नही. कहते है पैसो मे बड़ी ताक़त होती है, जब इंसान के पास पैसा आता है तो बाकी दुनिया उसे बहुत छोटी लगने लगती है जो इंसान उसको आगे बढ़ाने के लिए बलिदान देता है वो उसे भुला देता है बस वैसे ही हमारे साथ भी हुआ, हमारे बलिदान को भुला दिया गया. वैसे भी इंसान की एक फ़ितरत है की अगर कोई इंसान उसके लिए अच्छा काम करे तो उसे वो ज़्यादा टाइम तक याद नही रख पाता, उसे जल्दी भूल जाता है ओर अगर कोई इंसान उसके साथ ग़लत सलूक करे तो इंसान उसे कभी नही भूल पता. अक्सर मुझे मेरे कुछ रिश्तेदार अहसान फरामोश कहते है ओर शायद वो काफ़ी हद तक सही भी है उनको लगता है की हमने इसके लिए कई बार अच्छे काम किए पर फिर भी ये हमारे खिलाफ कहता है. पर अगर आप बात को मेरे नज़रिए से देखे तो मै आप से एक सवाल पूछता हू अगर आपको भूख लगी है ओर खाना चाहिए तो आप अपने घर मे अपने मा,पापा या अपने रिश्तेदारो को खाना देने के लिए कहेंगे या पड़ोस मे या अंजान लोगो के पास जाके खाना माँगेंगे? इंसान मुसीबत मे अपने घर के लोगो को याद करता है, अगर मै मुसीबत मे अपने रिश्तेदारो को याद करू तो क्या ग़लत है.अक्सर अगर कोई अपने रईस रिश्तेदार के खिलाफ बोले तो उनको ये लगता है की इसको हमारा पैसा चाहिए या इसको हमसे जलन होती है, मुझे भी ये आम लोगो मे कुछ इसी तरह दिखाने की कोशिश करते है पर ये पूरी तरह से ग़लत है. मुझे इनका पैसा नही चाहिए, मुझे इनका प्यार चाहिए, मै प्यार और अपनेपन का भूखा इंसान हू. मुझे प्यार ओर अपनेपन की भूख लगी है ओर वो घर के अपने लोगो से ही मिल सकता है उसकी आस मै अंजान लोगो से नही कर सकता. कुछ लोग कहते है की तुम क्यू उदास होते हो, तुम्हारे रिश्तेदार तो बहुत पैसे वाले है पर सच्चाई ये है की कुछ लोग ऐसे होते है जिनको 56 पकवानो से ज़्यादा अपने माँ की बनी हुई रूखी सुखी रोटी अच्छी लगती है. मै भी उन कुछ लोगो मे से एक हू जिसे 56 पकवान नही अपनी माँ के हाथो की बनी हुई रोटी अच्छी लगती है क्यूकी उसमे प्यार ओर अपनापन मिला होता है. मेरे अमीर रिश्तेदार अगर मुझे मिठाई भी दे तो वो भी मुझे जहर जैसी कड़वी लगती है क्यूकी उसमे द्वेष मिला होता है, उसमे अपनेपन ओर प्यार की मिठास नही होती. मै प्यार का भूखा इंसान हू. हमारे रिश्तेदार इतने चेतना शून्य हो गये है की वो हर चीज़ को पैसो के तराजू मे तोलते है.बहुत दुख होता है ये देखकर की आज हमारे घर के ही ताकतवर रिश्तेदार इस इंतजार मे रहते है की कब में मुसीबत मे घिरु ओर वो सहायता करने की बजाय मुझे अपमानित करे, मुझे जलील करे, मेरा मज़ाक उड़ाए. वो हमेशा इसी ताक मे रहते है की ये छोटी लाइन कब ओर ज़्यादा छोटी हो ओर हमारी लाइन लोगो के सामने ओर ज़्यादा बड़ी लगे. हमारे घर के कई लोग कपट को चालाकी समझते है ओर जो इंसान ज़्यादा कपटी है ,कमजोर लोगो को ज़्यादा जलील कर सकता है, वो ज़्यादा चालाक है. जहा तक मेने पढ़ा है चालाक इंसान उसे नही कहते जो अपने रिश्तेदारो को नीचे गिराए या उनको मुसीबत मे अकेला छोड़ दे, चालाक इंसान उसे कहते है जो अपने घर के लोगो को चाहे वो किसी भी मुसीबत मे हो उन्हे अपना मजबूत हाथ आगे करके उसे उपर उठाए. जो इंसान अपने लोगो को ही जलील करे उन्हे नीचे दिखाए उसे चालाक नही धूर्त, कपटी और षड्यंत्रकारी कहते है. मुझे हमारे परिवार के अधिकांश लोग पागल कहते है, जानते है क्यू? क्यू की में हमेशा दिल से सोचता हू. में पागल हू क्यूकी में लोगो से धूर्तता और कपट नही कर सकता. में पागल हू क्यूकी में कमजोर ओर ग़रीब लोगो को नीचे नही गिरा सकता. में पागल हू क्यूकी में हमेशा अच्छा सोचता हू. में पागल हू क्यूकी में रिश्तो के दिखावटपन मे विश्वास नही रखता. हमारे परिवार मे ये देखकर बहुत दुख होता है की यहा परिवार के लोग एक दूसरे से प्यार नही करते पर प्यार का दिखावटपन करते है. यहा रिश्ते स्वार्थ के रिश्ते है, ये बस अपने आप को लोगो मे दूसरे से उपर दिखाने मे लगे रहते है. अभी कुछ दिनो पहले की ही बात है हमारे परिवार के मुखिया को धार्मिक स्थान का दोरा करते हुए दिल का दोरा पड़ा था. ये देख कर बहुत अच्छंभा हुआ की उनके बेटे ओर उनके भाई ने इस विकट परिस्थिति मे भी गंदी राजनीति करनी शुरू कर दी. हमारे मुखिया ने ग़रीब और कमजोर वर्ग के लोगो के लिए कुछ अच्छे काम किए है. ग़रीब और कमजोर लोगो को जब ये पता चला की हमारे शुभचिंतक को दिल का दोरा पड़ा है तो वो दोड कर उनसे मिलने पहुचे पर उनको हमारे मुखिया के बेटे ओर भाई ने बीच मे ही रोक दिया. इन्होने अपने ख़ासमखास और अमीर लोगो को तो मुखिया से मिलने भेज दिया पर ग़रीब, कमजोर ओर वो लोग जो इनके ख़ासमखास नही है उनके लिए “नो एंट्री” का बोर्ड लगा दिया. बड़ा ही मार्मिक द्रश्य था जिसे शायद मे अल्फाजो मे बया ही नही कर सकता. कई वृद्ध लोग जो तकरीबन 70-80 साल की उम्र को भी पार कर गये थे वो हमारे मुखिया के बेटे ओर भाई के सामने गिडगिडा रहे थे की हमे उपर जाके सिर्फ़ उनसे मिल लेने दो सिर्फ़ उनकी शक्ल देख लेने दो ताकि हमारे दिल को शांति मिले पर हमारे शूरवीरो का दिल नही पसीज रहा था. उनको तो बस लोगो को इकठ्ठा करके अपनी शूरवीरता की डिंगे हाकनी थी.अगर सब लोगो को वो मुखिया के पास मिलने भेज देते तो उनकी शूरवीरता के किस्से कौन सुनता? वो लोगो को इकठ्ठा करके ये बता रहे थे की कैसे इन्होने धार्मिकस्थान से हमारे मुखिया को लाया ओर उनको अस्पताल मे भरती करवाया. वो ऐसा वर्णन कर रहे थे जैसे डॉक्टर बनकर ऑपरेशन तो इन्होने ही किया है. हमारे मुखिया के भाई, लोगो मे कुछ ऐसे बता रहे थे जैसे दिल के इलाज का ईजाद अभी-अभी हुआ है ओर इन्होने ही अपने भाई के लिए इसको ईजाद किया है. वहा बड़ा अजीब द्रश्य था ये अपने ख़ासमखास और पैसे वाले लोगो को तो पीछे के दरवाजे से उपर भेज रहे थे ओर बाकी सब लोगो को इकठ्ठा कर अपनी तारीफे करवा रहे थे. कई दिल के सच्चे लोग इनसे उपर जाके हमारे मुखिया से मिलने की गुहार लगा रहे थे या यू कहे की इनसे उपर जाने के लिए अस्पताल के पास की भीख माँग रहे थे ओर हमारे मुखिया के बेटे और भाई उन लोगो को अहंकार मे अकड़कर फटकार लगा कर उन्हे चुप करवा रहे थे.हमारे मुखिया ने पूरी जिंदगी अपने आप को "ग़रीबो का मसीहा" दिखाने मे लगा दी ओर इनके बेटे ओर इनके भाई ने इस तिलिस्म को एक दिन मे ही तोड़ दिया. उसदिन पहली बार मुझे समझ मे आया की हमारे जैन समाज के अधिकांश लोग हमे पूरे भीनमाल का सबसे बड़ा मूर्ख परिवार क्यू कहते है. इतना ही नही आज समाज का बुद्धिजीवियो का एक ख़ास तबका हमारे घर मे अपनी बेटी देने से भी कतराता है. उनका मानना है की हम चाहे अपनी बेटी को जिंदगी भर कुँवारी रख देंगे या उसे कुए मे फेक देंगे पर इस मूर्ख घर मे कभी रिश्ता नही जोड़ेंगे.आज इनको आत्ममंथन करना होगा की आख़िर समाज के बुद्धिजीवी लोगो की ऐसी धारणा क्यू है? आख़िर क्यू सभ्य लोग अपनी बेटी हमारे घर मे देने से कतराते है? हमारे मुखिया और उनके भाई जो आज लोगो मे लंबी-लंबी फेकते है सच्चाई तो ये है की लगभग 40 साल पहले उनको शादी के लिए कोई लड़की तक नही मिल रही थी.इन्होने गली-गली जाके लगभग 100 लोगो के हाथ पैर जोड़े तब कही जाके इनकी शादी हुई थी. आज भी हमारे घरो मे रिश्ते पैसे देखकर आते है या किसी मजबूरी मे आते है. कोई इंसान खुशी-खुशी अपनी बेटी की शादी यहा नही करना चाहता. हमारे घर के इन शूरवीरो को आत्मचिंतन करना चाहिए की आख़िर ऐसा क्यू है? मुझे लगता है लोगो मे सम्मान देकर सम्मान मिल सकता है, अगर हम लोगो का सम्मान ही नही करेंगे तो वो हमारा सम्मान कैसे करेंगे? सिर्फ़ अपना पैसा ओर अपनी अकड़ दिखाकर आप लोगो से सम्मान की उम्मीद नही कर सकते. अक्सर लोग अपने बीमार रिश्तेदार से लंबी बात करने नही सिर्फ़ उन्हे देखने आते है. लोग अपना सिर्फ़ चेहरा दिखाकर बीमार इंसान को ये तसल्ली दिलवाने आते है की हम सुख दुख मे आपके साथ है. हमारे मुखिया ने ग़रीबो के लिए कुछ अच्छे काम किए है इसलिए ग़रीब ओर कमजोर लोग इस क़र्ज़ का अहसान चुकाने आए थे की हम आपके साथ है. कई लोग बहुत दूर-दूर से आए थे वो उनके बेटे या भाई नही बल्कि उनसे मिलने आए थे. मेरा सवाल आम लोगो से क्या ग़रीब,कमजोर ओर दिल के सच्चे लोगो को इस तरह धूतकारना और फटकारना ठीक है ओर वो भी इसलिए क्यूकी वो आपके लिए हमेशा फिक्रमंद रहते है ओर रोज आपके लिए खुदा से दुआ सलामती की प्राथना करते है? क्या हमारे परिवार मे दो नियम बनते है, अमीर ओर ख़ासमखास लोगो के लिए एक नियम ओर कमजोर ग़रीब ओर दिल के सच्चे लोगो के लिए दूसरा नियम? कितनी हास्यास्पद बात है की हमारे मुखिया के भाई ओर उनके बेटे को लगता है की पैसेवाले लोग ओर इनके ख़ासमखास लोग अगर इनके पापा से मिलेंगे तो इनके पापा को कुछ नही होगा ओर अगर ग़रीब ओर दिल के सच्चे लोग इनके पापा से मिलेंगे तो उनकी तबीयत बिगड़ जाएगी. हमारे मुखिया के भाई ओर बेटे से एक बहुत बड़ी ग़लती ये हो गयी की इन्होने वहा टिकट नही रखी, अगर अस्पताल मे मिलने का टिकट रखते तो करोड़ो रुपये तो ऐसे ही इकट्ठा हो जाते. ग़रीब, कमजोर और दिल के सच्चे लोग अक्सर एहसान फ़रामोश नही होते वो पैसे उधार लेकर भी महँगी टिकट खरीदते और हमारे मुखिया को देखने जाते ताकि थोड़ा एहसान उतार सके. इनके भाई ओर बेटे ने पैसा बनाने का एक ओर बड़ा अवसर खो दिया.अक्सर हमारे मुखिया के भाई ओर बेटे इनका नाम लेकर अपनी रोटिया सेकते है. इनके बेटे ने सबसे पहले अपने पापा के नाम से बीमा कंपनी खोली. ग़रीब ओर कमजोर लोग ये सोच कर बहुत खुश हुए की ग़रीबो के मसीहा का बेटा तो उनसे भी आगे होगा पर उनकी खुशी जल्द ही एक खोफ़नाक सपने मे तब्दील हो गयी. इनका बेटा ज़बरदस्ती ग़रीब लोगो को उठा कर हॉस्पिटल मे भर्ती करवाता की में पूरा मेड़ीक्लैम पास करवा दूँगा ओर जब ग़रीब लोग हॉस्पिटल का पैसा भर के इस आस मे रहते की मेड़ीक्लैम का चेक आएगा तो ये देखकर उनके पाँव से ज़मीन ही खिसक जाती की उनके अस्पताल के बिल का आधा पैसा भी मेड़ीक्लैम से पास नही हुआ है. बेचारे कई मरीज तो हॉस्पिटल के बिल को याद करके ही दूसरी बार हॉस्पिटल पहुच जाते. ये देखकर अजीब लगता है की इनके बेटे से अमीर लोगो के तो झूठे मेड़ीक्लैम भी पास हो जाते है पर बेचारे ग़रीब लोगो के सही बिल भी पास नही हो पाते. ये कभी कोशिश भी नही करते ग़रीब लोगो के हक की लड़ाई लड़ने की. अपने पापा के नाम से बनाई हुई बीमा कंपनी से लोगो को हॉस्पिटल घुमाकर ओर करोड़ो रुपय लूटकर इन्होने अपने पापा के नाम से दूसरी एक ओर बड़ी कंपनी खोली शेयर ब्रोकरिंग की. लोगो से एक का दस बनाने का वादा किया गया. इनकी दुकान तो खूब चली पर बेचारे आम लोग सट्टेबाज़ी से बर्बाद हो गये और घर मे ताले लग गये. आम जनता से लाखो करोड़ो रुपये लूटने के बाद भी इनका पेट नही भरा है ओर एक बार फिर इन्होने अपने पापा का नाम आगे रख कर एक नयी बड़ी कंपनी खोली है बिल्डिंग बनाने की. ये अपने दानवीर पिता का नाम आगे रख कर भीनमाल मे बिल्डिंग बनवाकर फ्लेट बेचने की तैयारी कर रहे है. 4 लाख का फ्लेट 40 लाख मे. जिस 1 फ्लेट की लागत 4 लाख रुपये भी नही बैठती उसको ये 40 लाख रुपए मे लोगो को पहनाने की तैयारी कर रहे है. एक सीधा सवाल आम लोगो से क्या अपने गाँव के, अपने समाज के लोगो को ही लूटना सही है? अगर हम करोड़ो रुपये मंदिर बनवाने मे खर्च कर सकते है तो अपने गाँव,अपने समाज, अपने घर के लोगो को ही सस्ते दामो पर घर क्यू नही दिलवा सकते. आम लोगो के लिए रोटी,कपड़ा ओर मकान ये तीन मूलभूत आवश्यकता है. आम लोगो को रोटी ओर कपड़ा तो मिल जाता है पर घर उसे सस्ता क्यू नही मिल पाता? हम अपने समाज के मध्यम ओर ग़रीब लोगो को सस्ते दामो पर घर क्यू नही दे सकते? अगर आप कहते है की आपकी मकान बनाने की लागत ज़्यादा रहती है तो आप पारदर्शिता से काम क्यू नही करते जिसमे आप बिल्डिंग बनाने की वास्तविक लागत बताए, उस फ्लेट को बनाने मे जितना खर्च हुआ है बिना किसी नफे नुकसान के क्यू ना वो समाज के आम मध्यम और ग़रीब वर्ग के लोगो को दे दिया जाए. ये भी तो एक समाज सेवा ही हुई ना. ये देखकर अक्सर मुझे हैरानी होती है की हमारे समाज के रईस लोग करोड़ो, अरबो रुपये मंदिर बनाने मे खर्च कर देंगे पर जब आम लोगो के लिए सस्ते दामो पर घर दिलवाने की बारी आती है तो सब पीछे हट जाते है. क्या मंदिर बनवाकर, सफेद संगमरमर पर बड़े अक्षरो मे अपना और अपने पिताजी का नाम खुदवाने से ही आपका और परिवार का नाम रोशन हो सकता है? अगर हम अपने गाँव, अपने समाज के लोगो के लिए हॉस्पिटल बनाए, स्कूल-कॉलेज खुलवाए, वरद्धाश्रम खुलवाए ओर ग़रीब ओर मध्यम वर्ग के लोगो को सस्ते ओर कम दामो पर घर दिलवाए तो क्या उससे हमारा और परिवार का नाम रोशन नही हो सकता? हमारे मुखिया के भाई भी समाज के आम लोगो को लूटने मे पीछे नही है. इन्होने भीनमाल मे एक बड़ा शाही शादी हॉल बनवाया है. शादी हॉल या यू कहे की एक शानदार आलीशान हवामहल बनवाया है.इसमे इतने पंखे लगे हुए है की अगर सब पँखो को चालू कर दिया जाए तो इंसान उस हॉल मे चलने नही उड़ने लगेगा. शादी हॉल का किराया 1500000 से 200000 रुपये के बीच मे रखा गया है. फिर से एक बड़ा सवाल- शादी हॉल का एक दिन का खर्चा 3000 से ज़्यादा होता ही नही है तो हमारे जैन समाज के लोगो से 1500000 से 200000 रुपये वसूलना कहा तक सही है. लोगो को लूटने की भी कोई सीमा होती है, हमारे शूरवीरो ने सारी सीमाए तोड़ दी है. अपने ही जैन समुदाय के लोगो को लूटना क्या सही है? अपने गाँव मे तो हमे समाज सेवा करनी चाहिए. हम ये क्यू नही समझते की हमारी इन हरकतों से गाँव मे रहनेवाले लोगो को कितनी दिक्कते होंगी, उनका जीना हराम हो जाएगा. अक्सर हमारे भीनमाल मे 5000 रुपय वाले शादी हॉल भी मिल जाते है वो भी इसलिए क्यूकी अभी भी हमारे भीनमाल मे कुछ समाज सेवी जिंदा है. अगर हम शादी के हॉल का किराया 1500000 रुपय रखेंगे तो जो 5000 रुपये मे हॉल देता है वो भी ये सोचेगा की में पैसे कम क्यू लू? में 1.5 लाख नही तो 1 लाख ही लूँगा ओर इस तरह गाँव मे भी महँगाई बढ़ जाएगी. भीनमाल मे अक्सर मध्यम या ग़रीब वर्ग के लोग ही शादी करते है. अगर हमने अपने गाँव मे इसतरह महँगाई बढ़ा दी तो ग़रीब ओर मध्यम परिवारो के लोग कहा जाएँगे? उनकी बहन-बेटियो की शादिया कैसे होंगी? हमारे शूरवीर को शादी हॉल का किराया ग़रीब वर्ग के लोगो के लिए 2000 या हो सके तो फ्री मे ओर मध्यम वर्ग के लोगो के लिए किराया 3000 या हो सके तो ओर कम रखना चाहिए. मेरा मानना है की ग़रीब लोगो की बेटी का कन्यादान भी हमे खुद करना चाहिए. कन्यादान महादान है. हमे ग़रीब ओर मध्यम लोगो से ज़्यादा पैसे नही लेने चाहिए ओर वो भी अपने गाँव के लोगो से तो कभी नही. ये सब सेवा का एक रूप है, आप जितना पुण्य मंदिर बनवाने मे नही कमाएँगे उससे कई गुना ज़्यादा पुण्य आप, लोगो की सेवा करके, ग़रीब लोगो की बहन-बेटियो की शादी करवाके और ग़रीब लोगो को सस्ता घर देकर कमा लेंगे. ये देखकर दुख होता है की हमारे घर के ताकतवर लोग ग़रीब ओर मध्यम वर्ग के लोगों को ही लूट रहे है. अभी तो बुढ़ापा भी आ गया है अगर अभी दान पुण्य शुरू नही किया तो कभी करेंगे. चाहे हमने सारी उमर लोगो को लूटा है, ग़रीब लोगो को सताया है, उनका खून चूसा है पर अभी बुढ़ापे मे तो अच्छे कर्म शुरू कर देने चाहिए. अक्सर बुजुर्ग लोग कहते है की इंसान को 50 साल के बाद घर-परिवार, मोह-माया त्याग कर नेक काम करने चाहिए. इस सांसारिक मायाजाल को तोड़कर हमे धर्म ओर आध्यात्म मे लीन होना चाहिए.आज गाँव मे बड़ी विकट स्तिथि उत्पन्न हो गयी है,शहर के कई अमीर लोग शहर मे लोगो को लूट कर अब गाँव का रूख़ कर रहे है. आप सब शहर मे रहने वाले जानते ही है की शहर की “ बिल्डर लॉबी” ने किस तरह मकानो की कीमत बढ़ा कर शहर के आम लोगो का जीना हराम कर दिया है. शहर के लोगो को लूटकर अभी इन्होने गाँवो का रूख़ किया है. आज भीनमाल मे भी ऐसी ही बिल्डिंग लॉबी धीरे-धीरे अपने पाँव पसार रही है. कहते है की एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है ओर हमारे भीनमाल के पवित्र ओर पावन तालाब मे तो सेकड़ो खून चूसनेवाली मछलिया पैदा हो रही है. बिल्डर लॉबी इतनी ताकतवर होती है की अगर इन्होने एक बार भीनमाल मे अपने पैर जमा लिये तो इन खून पीनेवाली मछलियो को हमारे पवित्र भीनमाल से निकालना आसान नही होगा. अभी भीनमाल मे कुछ बिल्डर लोगो से लग्जरी फ्लेट बनाने के नाम पर वास्तविकता से कई गुना ज़्यादा कीमत पर घर बेचने की तैयारिया कर रहे है. भीनमाल मे कई लोग इस बात पर खुश हो रहे है की हमारे घरो की भी कीमत बढ़ेगी पर वास्तविकता इससे कोसो दूर है. अगर एक बार ये बिल्डर लॉबी सक्रिय हो गयी तो हमारे गाँव मे जहा आज राम राज है वहा जंगल राज ओर गुंडा राज आ जाएगा. बिल्डर लॉबी कभी किसिका फ़ायदा नही करती, वो सब कुछ बस अपने लिए करती है. जैसा शहरो मे होता है वैसा गाँवो मे भी होगा. शहर मे कई बिल्डर लोगो को धमकाकर उनसे सस्ते दामो पर ज़मीन खरीदते है ओर मह्न्गे दामो पर बेचते है ओर इस काम के लिए कई पॉलिटिशियन्स, ब्यूरोक्रेट्स, बड़े अधिकारी उनके साथ होते है. शहरो मे तो अक्सर मीडीया बहुत सक्रिय रहती है इसलिए कई लोगो को न्याय मिल जाता है पर गाँवो मे मीडीया नही पहुच पाती है. पैसा एक ऐसी चीज़ है की ये जिस भी क्षेत्र से जुड़ गया तो वो क्षेत्र एक तरह से बर्बाद हो जाता है. आप सिनेमा को ही ले लीजिए, जिस तरह की फ़िल्मे ओर गीत 1960 से 1980 के दशक मे हुआ करती थी वैसी आज बनने की उम्मीद ही नही कर सकते. ज़्यादा पैसे कमाने की चाहत मे ऐसे फूहड़ ओर अश्लील गीत बनते है जिनको पारिवारिक सभ्य लोग गा ही नही सकते. क्रिकेट को भी देखे तो 1983 के क्रिकेटरो मे जिस तरीके की देश के प्रति सच्ची देशभक्ति होती थी वो आज दिखती ही नही. सब पैसो के लिए खेलना चाहते है. वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट की जगह ये आइ.पी.एल. को ज़्यादा महत्व देते है क्यूकी उसमे पैसा बहुत ज़्यादा मिलता है ओर रात भर “नाइट पार्टी” चलती है उसका मज़ा अलग. अगर यही पैसा हमारे गाँव भीनमाल से भी जुड़ गया तो यकीन मानिए कुछ सालो बाद आप ओर मुझ जैसे लोगो को भीनमाल मे घुसने ही नही दिया जाएगा. यहा गुंडा राज ऐसा फेलेगा की अगर कोई भी बिल्डर लॉबी के खिलाफ बोलेगा या उनको सस्ते दामो पर ज़मीन नही देगा तो उसको उपर भेजने का इंतज़ाम कर दिया जाएगा जैसा अक्सर शहरो मे होता है ओर उसकी सुनवाई कही नही होगी क्योकि पैसो मे सब बिक गये होंगे. हमे आज ही कुछ कड़े कदम उठाने होंगे. हमे लालची बिल्डरों के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी की आप मकान या फ्लेट बनाइए उसे बनाने से आपको कोई नही रोकेगा पर महंगे दामो पे उन्हे बेचना ग़लत है.भीनमाल के शुभचिंतको को एक आंदोलन चलाना होगा “भीनमाल बचाओ” आंदोलन. उन्हे लालची बिल्डरों के घर के बाहर शांति पूर्वक प्रदर्शन करना होगा, उनके घर के बाहर ही लेटकर भूख हड़ताल करनी होगी जब तक इन पैसो के लालची, भूखे भेड़िओ की आँखे नही खुल जाती. अगर वो कीमत ज़्यादा बता रहे है तो आख़िर क्यू? उसे बनाने मे वास्तविक कॉस्ट क्या बैठती है इसको पहले आम लोगो को बताना होगा. हमारे घर के भी कुछ बिल्डर बहुत ज़्यादा खुश हो रहे है की हमारे तो फ्लेट ओर महँगे बिकेंगे. मेरा मानना है की चाहे वो मेरे घर के लोग ही क्यू ना हो अगर हमारे गाँव,हमारे समाज मे कुछ ग़लत हो रहा हो तो उनके खिलाफ आवाज़ उठाना ग़लत नही है. मकानो की कीमत एक बार बढ़ गयी तो उसको कम करवाना आसान नही होगा और धीरे-धीरे बिल्डर अपने पैसो की ताक़त के दम पर सबको खरीद देंगे. कई ग़रीब ओर मध्यम वर्ग के लोग ऐसे है जो शहर के जीवन से तंग आ गये है और वापस अपने गाँव मे बसना चाहते है, अगर कीमते ऐसे ही बढ़ गयी तो उनकी हसरते दिल मे ही रह जायेगी.हमे हमारे समाज की सोच बदलनी होगी,अन्याय के खिलाफ लड़ना होगा. कोई भी समाज परफ़ेक्ट नही होता उसे परफ़ेक्ट बनाना पड़ता है. इस दुनिया मे जिंदगी जीने के दो ही तरीके है या तो जैसा हो रहा है होने दो,बर्दाश्त करते रहो या ज़िम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की. अन्याय करना ओर अन्याय सहना दोनो महापाप है. इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी. ये देख कर बहुत अफ़सोस होता है की ग़रीब लोगो के हक के लिए आज समाज मे कोई आवाज़ ही नही उठाता. हमारे गाव के पंच, सरपंच ओर समाज के माननीय लोग बस पैसे वालो को सेल्यूट करने मे लगे रहते है, कोई समाज के लूटेरो के खिलाफ कुछ कहता ही नही. आज लोग भले ही चुप रहे पर वो जानते नही वो जिस तरफ बढ़ रहे है उसके दूरगामी परिणाम बहुत ख़तरनाक हो सकते है. अक्सर बिल्डर कहते है की हम तो गाँव का विकास कर रहे है पर ये सरासर झूठ है अगर आपको भीनमाल का विकास ही करना है तो यहा कुछ उद्योग धंधे लगाओ, फेक्ट्रिया लगाओ जिसमे हमारे समाज के लोगो को नोकारिया मिलेगी और रोज़गार के नये अवसर पैदा होंगे. गाँव मे महँगे दामो पर मकान बेचने से ओर सिर्फ़ मंदिर बनवाने से गाँव का विकास नही होगा. आज समाज मे बस दिखावट ही रह गयी है. कोई दिल से समाज सेवा नही करना चाहता. समाज तो दूर की बात है यहा तो सब रिश्ते नाते भी दिखावटी हो गये है. जब कभी में खुद अपने घर मे हमारे मुखिया ओर उनके भाई को देखता हू तो बड़ा अजीब लगता है. इनका रिश्ता प्यार का नही स्वार्थ का रिश्ता है. दोनो भाई बस एक दूसरे की पीठ खुजाने का काम करते है.अगर एक भाई दूसरे की पीठ खुजाना बंद कर दे तो दूसरा भी उससे मुहँ फेर लेता है.हमारे मुखिया का व्यवहार भी बड़ा अजीब ओर हैरानी भरा है. वैसे ये अपने आपको बहुत बड़ा समाजसेवी कहते है पर वास्तविकता मे ये हमेशा असामाजिक तत्वो को ही बढ़ावा देते है. ये बड़े शान से कहते है की इनके छोटे भाई की पहुँच बहुत बड़े–बड़े गुणडो से है इतना ही नही ये बड़े गर्व से यहा तक कहते है की इनके भाई की एक घरवाली,एक बाहरवाली ओर एक विदेशवाली थी. एक बड़ा सवाल क्या गुंडे समाज के लिए अच्छा काम करते है,उनसे दोस्ती कहा तक सही है? बड़ी हैरानी होती है की लोगो को धमकाने वाले, उन्हे जान से मारने वाले, लोगो मे नशीली दवाएँ बेचने वाले लोग इनके लिए महान है.उनकी ये दिन रात पूजा करते है. उनको दिल से बहुत सम्मान देते है ओर दूसरी तरफ अच्छे लोगो के लिए इनके दिल मे बिल्कुल जगह ही नही है. हमारे मुखिया अपने बेटे को भी अंडरवर्ल्ड डॉन की तरह बनाना चाहते है जिसके नाम से ही गाँव के लोग डरने लगे. अगर इनका बेटा ग़रीब ओर कमजोर लोगो को नीचे दिखाता है तो ये बड़ा गर्व महसूस करते है की मेरा बेटा शेर है. मुझे लगता है इनकी सोच मे कुछ खामी है. जो अपने घर के लोगो को ओर भोले-भाले मासूम लोगो को नीचे गिराए वो शेर नही वो बहुत बड़ा गधा होता है. जिस तरह गधा ढेचु-ढेचु करता रहता है हमारे मुखिया का बेटा भी बस उसी सुर मे गाता रहता है. शेर तो वो होता है जिसकी एक दहाड़ से पूरा जंगल हिल जाता है, ये तो ऐसा है की ग़रीब ओर मासूम लोगो को देख कर तो ये अपने आप को शेर दिखाने लगता है ओर पैसे वालो के सामने गीदड़ बन जाता है. मुझे लगता है हमारे भाई जान की तुलना मे गधे से भी नही कर सकता नही तो गधे भी नाराज़ हो जाएँगे,गधो का भी ये बहुत बड़ा अपमान होगा. हमारे भाई जान की सोचने समझने की मानसिकता गधो से भी गयी गुज़री हो गयी है. इसको इतनी भी तहज़ीब नही है की लोगो से कैसे बात करते है. अक्सर ये कहता है की इसका दिमाग़ बहुत गर्म है. मुझे लगता है इसके दिमाग़ को टेस्ट करवाने अमेरिकन रिसर्च इन्स्टिट्यूट मे भेजना चाहिए की आख़िर क्यू इसके दिमाग़ मे ग़रीब लोगो को देखकर हीटर ऑन हो जाता है ओर पैसे वाले लोगो को देख कर इसके दिमाग़ मे ए.सी. ऑन होकर दिमाग़ एकदम ठंडा-ठंडा कूल-कूल हो जाता है? इसपर विदेशी लोग भी रिसर्च करेंगे ओर मुझे लगता है की ये शायद 21वी सदी की बहुत बड़ी खोज होगी की इस दुनिया मे पहला ऐसा इंसान मिलेगा जिसकी खोपड़ी मे भेजा नही भूसा भरा हुआ होगा. अक्सर लोग पढ़ लिख कर डॉक्टर बनना चाहते है,इंजीनियर बनना चाहते है,आइ.ए.एस. ऑफीसर बन कर देश की सेवा करना चाहते है पर हमारे मुखिया का बेटा पढ़ लिखकर बी.कॉम कर के देश की सेवा करने की बजाए बहुत बड़ा गुण्डा बनना चाहता है. ऐसा गुंडा जिसके सामने शोले फिल्म का गब्बरसिंग भी कुछ नही दिखे, इसको ऐसा डाकू बनना है जिसके नाम से पूरा गाँव सहम जाए. इनके पापा चाहते है की मेरा बेटा बहुत बड़ा बिल्डर बने ओर लोग उसकी एक आवाज़ पर अपने घर बार इसको सस्ते दामो पर दे दे. सच मे अगर इनके पापा ऐसे ही सपोर्ट करते रहे तो जल्दी ही हमारा भाई प्रसिद्ध “ग्लोबल टेररिस्ट” बन जाएगा या शुद्ध हिन्दी मे कहे तो "कुख्यात ख़ूँख़ार ख़तरनाक आतंकवादियो का सरगना" बन जाएगा ओर मुझे लगता है की इनके बेटे मे गुंडा बनने की इतनी काबिलियत है की जल्दी ही इसके सामने ओसामा बिन लादेन, दाउद इब्राहिम ओर बड़े से बड़े गुंडे भी बच्चे दिखने लगेगे. इसकी तरह इसकी सोच भी बड़ी विचित्र है वैसे ये अपने आप को हमारी कुलदेवी क्षेमंकरी माँ का बहुत बड़ा भक्त बताता है ओर उसी क्षेमंकरी मंदिर मे ये मनो कामना करता है की उसे लड़की नही चाहिए उसे लड़का ही चाहिए. ये लोगो को बताता है की इसे लड़कियो से बहुत नफ़रत है ओर ये चाहता है की इसके घर मे लड़के का ही जन्म हो ओर ऐसा ही हुआ. बड़ा अजीब लगता है की अगर इसको लड़कियो से इतनी ही नफ़रत है तो इसने शादी लड़की से क्यू की? किसी लड़के से करता, वैसे भी आज कल समाज मे ऐसे लोगो की तादात काफ़ी तेज़ी से बढ़ रही है, इसमे एक नाम इसका भी शामिल हो जाता. सच मे अगर समाज मे इसके जैसी सोच वाले लोग पैदा हो गये तो ये दुनिया ही ख़त्म हो जाएगी,क्यूकी लड़किया तो पैदा ही नही होगी ओर अगर हो भी गयी तो उनको मौत के घाट उतार दिया जाएगा. बड़ा ही हास्यास्पद लगता है की ये लोगो को तो मूर्ख बनाता ही है देवी माँ को भी मूर्ख बनाने मे पीछे नही रहता. जो इंसान अगर महिलाओ का सम्मान नही कर सकता उन्हे तुच्छ समझता है तो देवी माँ जो खुद एक महिला है उनका क्या सम्मान करता होगा? ये देवी माँ को नही सिर्फ़ पैसो को पूजता है.हमारे मुखिया के बेटे को अपनी मानसिकता बदलनी होगी. ग़रीब ओर कमजोर लोगो को सताना ओर उन्हे अपमानित करना ग़लत है. अगर किसी दिन एक ग़रीब की भी बद्दुआ लग गयी तो इसके परखच्चे उड़ जाएँगे, उनकी ऐसी हाए लगेगी की ना तो तुम्हारे पापा,ना तुम्हारा पैसा ओर ना तुम्हारा अहंकार उस विनाश से तुम्हे बचा पाएगा. मुझे लगता है इसे अपना सोचने समझने का तरीका बदलना होगा. कोई इंसान पैसो से छोटा बड़ा नही होता वो अपने आदर्शो से छोटा बड़ा होता है. आज मुझे अपने भाइयो को देख कर बहुत दुख होता है, में चाहता हू की मेरे भाई सड़कछाप गुंडे,डाकू,लूटेरे या बदमाश ना बने, मेरे भाई ऐसे अच्छे सभ्य इंसान बने की पूरी दुनिया उनकी कायल हो. अगर इनका एक पैर भारत मे तो दूसरा पैर न्यूयॉर्क, लंदन ओर पेरिस मे हो. जब भी में हमारे गाँव के “यंग टॅलेंटेड” लोगो को देखता हू तो अच्छा लगता है,वो बड़े गर्व से कहते है की मुझे मेहता होने पे गर्व है या मुझे गोवाणी होने पे गर्व है या मुझे जोगाणी होने पे गर्व है, में जब अपने घर के लोगो के बारे मे सोचता हू तो थोड़ा उदास हो जाता हू क्यूकी में अपने घर के लोगो के विचारो को देखकर ये गर्व से नही कह सकता की मुझे भी अपने घर के लोगो पर गर्व है. क्या करू में अपने घर के लोगो जैसा चालाक नही हू, में अपने आप को मूर्ख नही बना सकता, में अपने आप को धोका नही दे सकता ओर झूठी तसल्ली नही दे सकता की सच मे हम महान है. आप ही बताइए में किस बात पर गर्व करू? क्या मे इस बात पर गर्व करू की हमारे घर के लोगो के कॉंटॅक्ट्स बड़े-बड़े अंडरवर्ल्ड के लोगो से है जिनकी ताक़त के बल पर हम भोले भाले मासूम लोगो को आसानी से निशाना बना सकते है? या में इस बात पर गर्व करू की हम अपने गाँव के मासूम लोगो को ही लूटने का काम करते है, उनको शादी का हॉल 3000 की जगह 1500000 मे देते है और 4 लाख के घर को 40 लाख मे बेचने की फिराक मे रहते है? या मे इस बात पर गर्व करू की हम बहुत बड़े गुंडे बन चुके है, लोगो को धमकाना और लूटना हमारी प्राथमिकता बन गयी है? या मे इस बात पर गर्व करू की हम अबला नारियो पर जमकर अत्याचार करते है, उन्हे पैरो की जूती समझते है? चाहे ये इस बात को स्वीकार ना करे पर इनके दिमाग़ के किसी कॉर्नर मे इस तरह के विचार ज़रूर है. ये देख कर अच्छा लगता है की भीनमाल मे कई अच्छे लोग ऐसे है जो बेटी होने पर मिठाइयाँ बाटते है पर हमारे मुखिया का बेटा लड़की होने से पहले ही सिर पर हाथ रखकर मातम मनाना शुरू कर देता है ओर प्रार्थना करता है की इसके घर लड़की पैदा ना हो. अगर हमारे पूर्वज उपर से हमे देख रहे होंगे तो वो भी सिर पर हाथ रखकर उपर मातम मना रहे होंगे की हमने कैसे बच्चो को जन्म दे दिया? जितनी मेहनत से हमारे पुर्वजो ने इस घर को सिंचा ओर पूरे गाँव मे सोने की मोहरे बाँटने वाला मोरखिया परिवार होने की एक अलग पहचान दी उस सोने के नाम को आज हमने मिट्टी मे मिला दिया. सोने की मोहरे बाटने वाले मोरखिया नाम को मूर्ख लोगो का मूर्खिया बना दिया. आज समाज मे लोग इनको मूर्ख बुलाते है तो इनको इसमे भी अपनी शान दिखती है, मूर्ख होना तो जैसे इनका जन्म सिद्ध अधिकार बन गया है. ऐसा नही है की हमारे परिवार मे सब मूरख लोग है. हमारे परिवार मे कई ऐसे विद्वान लोग भी है जिनके जैसे लोग दुनिया मे ओर कही नही मिलेंगे पर अफ़सोस ये है की वो आगे ही नही आ पा रहे है. हमारा पूरा मोरखिया परिवार विद्वान लोगो से भरा पड़ा है.हमारा मोरखिया परिवार विद्वानों की ख़ान से भरा पड़ा है बस इस कोयले की ख़ान से हीरे निकालने वाले चाहिए.हमारे मुखिया के भाई ओर बेटे उनसे अक्सर एक सवाल पूछते रहते है, मुखिया का भाई उनसे पूछता है की “भाया,भाया,यू किकण? में दुनिया का सबसे चालाक इंसान हू,दुनिया के किसी भी इंसान को बाटली मे उतार सकता हू, फिर भी भीनमाल के बुद्धिजीवी लोग मुझे महामूर्ख क्यू कहते है?” हमारे मुखिया का बेटा भी मुखिया से पूछता है की “पापा,पापा हम करोड़ो रुपये के संघ निकालते है,सेकड़ो लोगो को मंदिरो के दर्शन करवाते है,लोगो को ढेर सारा खाना खिलाते है फिर भी लोग हमे भीनमाल जैन समाज का सबसे बड़ा मूर्ख घर क्यू कहते है? हमारे मुखिया ऐसे सवालो पर गहन चिंतन मे डूब जाते है,वो गहन चिंतन कर भी ऐसे सवालो का सही जवाब नही दे पाते. मुझे लगता है अगर हम समाज के लोगो को सम्मान नही दे ओर उनको नीचे दिखाकर उनसे ज़बरदस्ती अपनी तारीफे करवाए तो लोग हमारे सामने तो ज़रूर हमारी तारीफे कर देंगे लेकिन हमारे जाने के बाद लोगो मे सच्चाई कहने लगेंगे. समाज के बुद्धिजीवी लोग मूर्खो को मूर्ख नही तो क्या बीरबल का जिगरी यार कहेंगे? हम मूर्खो जैसे ही काम करते है. हमे ये समझना होगा की लोगो को नीचे गिराकर हम खुद कभी बुद्धिशाली नही बन सकते. लोगो मे सिर्फ़ पैसे खर्च करने से सम्मान नही मिलता बल्कि लोगो को सम्मान देने से सम्मान मिलता है. अगर कोई हमारे खिलाफ बोलता है तो हम उसे धमकाने लगते है जैसे हमसे बड़े गुंडे तो आज तक इस दुनिया मे पैदा ही नही हुए. मुझे लगता है की अगर हमे अपने आप को बुद्धिशाली बताना हो तो जो बुद्धिजीवी इंसान हमारी बुराई कर रहा हो उसकी जमकर तारीफे करना चाहिए, वो कब तक हमारी बुराई करता रहेगा? अगर वो बुराई करता रहे तो भी जब वो एकांत मे चिंतन करेगा तो सोचेगा की “में इनको मूरख क्यू कह रहा हू? ये तो मेरी तारीफे कर रहे है, मेरी तारीफे करने वाले मूरख कैसे हो सकते है? वो तो महान विद्वान होंगे जिन्होने मुझे पहचान लिया.” फिर वो हमे मूर्ख कहने की हिमाकत नही करेगा. हम लोगो को उँचा उठा कर और अपने विरोधियो का दिल जीत कर ऊपर बढ़ सकते है ओर समाज मे महान विद्वान बन सकते है. हमारे मुखिया चाहे जितना सीना तान कर लोगो मे अपने आप को टोकरचंद सेठ कहलवाए पर सच्चाई ये है की बुद्धिजीवी लोग हमे कचरे की टोकरी से ज़्यादा कुछ नही समझते ओर हमे कचरे की टोकरी बनाने मे इनके भाई ओर बेटे का बहुत बड़ा योगदान है. अगर आज हमे हमारे समाज मे वापस एक उँचा दर्जा पाना है तो समाज के लिए कुछ अच्छे काम करने होंगे, अगर हमारे शूरवीर कहते है की हमने करोड़ो रुपये के मंदिर बनवाए, संघ निकाला, नोकारसी लेकर लोगो को खाना खिलाया तो ये समाज सेवा नही हुई ये तो हमने अपने नाम के लिए काम किया. सच पूछे तो इससे समाज के आम लोगो को क्या मिला? समाज सेवा तो वो होगी जिसमे हम समाज के लोगो के लिए कुछ नेक काम करेंगे जैसे समाज के लोगो का अस्पताल मे सस्ते दामो पर इलाज करवाएँगे, ग़रीब लोगो की बहन बेटियो की शादिया करवाएँगे, सस्ते दामो पर समाज के आम लोगो को घर दिलवाएँगे. ऐसे कामो को सच मे समाज सेवा कहते है. मंदिर बनवाकर,लोगो को यात्रा करवाकर हम अपना और परिवार का नाम रोशन करते है,समाज सेवा नही. हम चाहे अपने मुहँ मिया मिट्ठू बने पर सच्चाई ये है की आज तक हमने समाज के लिए कुछ किया ही नही है, महाराष्ट्रा और मुंबई मे रहकर मुंबईकर और मराठी मानूस के लिए भी कुछ नही किया है,सबको लूटने का ही काम किया है. समाज तो छोड़िए हमने अपने घर के लोगो को भी लूटने का ही काम किया है. आज हमारे घरो मे ही ऐसे कितने ही लोग है जिनके दिल की तमन्ना है की उनका भीनमाल मे एक छोटा सा प्यारा सा आशियाना हो पर वो आर्थिक रूप से इतने शक्तिशाली नही है की महँगे घर खरीद सके. अगर हमारे शूरवीर चाहे तो वो मध्यम वर्ग के लोगो को 4 लाख के फ्लॅट 3 लाख मे दिलवा सकते है. आख़िर ऐसा क्यू नही हो सकता? जब हम करोड़ो रुपये मंदिर बनवाने मे खर्च कर सकते है तो अपने लोगो की ही दिल की मुराद क्यू पूरी नही कर सकते? क्या मंदिर बनवाने से ही आपको दुआए मिलेंगी,अगर आपने सस्ते दामो पर ग़रीब और अपने घर के लोगो को मकान दिए तो उससे दुआए नही मिलेंगी? शादी के हॉल का भी अपने जैन समाज के लिए इतना महँगा किराया उचित नही है. हमे उसे भी 3000 करना होगा ओर शादी हॉल के नीचे जो दुकाने बनाई है उसे बिना किसी किराए के, जैन समाज के बेरोज़गार नवयुवको को देनी चाहिए. समाज सेवा करने के लाखो तरीके है,हमे नेक काम करने चाहिए. आम लोगो को बाटली मे उतारने का काम तो शैतान करते है, हमे तो अलादीन की तरह बनना चाहिए जो बाटली मे बंद किए हुए लोगो को बाहर निकालने का काम करता है.हमे लोगो की आखे खुलवाने का काम करना चाहिए उनको मूर्ख बनाने का काम नही करना चाहिए. हमारे मुखिया ओर घर के लोगो को अपने अहंकार को जीत कर लोगो मे प्यार बाटने की शुरुआत करनी होगी,दिखावटी प्यार को वास्तविक प्यार मे तब्दील करना होगा.सबसे पहले हमे ये समझना होगा की प्यार कहते किसे है? प्यार कभी अल्फाजो मे बया नही होता. प्यार एक एहसास है जिसे सिर्फ़ दिल से महसूस किया जाता है. अगर आपको किसी को जतलाना पड़े तो समझिये वो प्यार नही है वो दिखावटपन है. प्यार जुबा से नही दिल से बयाँ होता है. अगर हमारे मुखिया के भाई को सच मे अपने भाई से दिल से प्यार है तो उन्हे शहर-शहर,गली-गली ये ढिंढोरा पीटने की ज़रूरत ही नही थी की में अपने भाई के लिए कितना फ़िक्रमंद था. लोगो मे उपरी दिखावट दिखाकर आप इसे प्यार का नाम नही दे सकते,वो तो बहुत बड़ा ढोंग है. में अपनी माँ से बहुत प्यार करता हू, में अपनी पत्नी अपने दोनो बच्चो से बहुत प्यार करता हू पर आज तक मेने उन्हे कभी ये जतलाने की कोशिश नही की की मुझे उनसे कितना प्यार है. अगर मुझे प्यार बताना पड़े या आम लोगो मे दिखाना पड़े तो वो प्यार नही है वो तो प्यार का ढोंग है,वो तो प्यार का दिखावटपन है,प्यार की नोटॅंकी है ओर ऐसा करके मे दूसरो को ही नही अपने आप को भी मूर्ख बनाउँगा. हमारे मुखिया और उनके भाई ने यश चोपड़ा की रोमांटिक फ़िल्में बहुत देखी है इसलिए ये अपनी पत्नियो से तो सच्चा प्यार करते है जो इनकी पत्निया कहती है ये वोही काम करते है ओर बाकी लोगो और अपने रिश्तेदारो से प्यार होने की नोटॅंकी करते है,इनको घर के बाकी सदस्यो की परवाह ही नही है. अक्सर हमारे शूरवीर लोगो मे ढिंढोरा पीट-पीट कर कहते है की हम एक है-हम एक है, पर इसमे कुछ भी सच्चाई नही है. आज हमे ये भी नही पता की सयुक्त परिवार या एक परिवार होना किसे कहते है. एक परिवार का मतलब एक घर मे रहना ओर खाना खाना नही पर एक दूसरे के दिल से जुड़ना है. कई लोग ऐसे हे जिनका एक भाई दिल्ली मे है तो दूसरा दुबई मे या एक भाई मुंबई मे है तो दूसरा मेन्हटन मे पर फिर भी इनके रिश्ते इतने गहरे है की हज़ारो किलोमीटर की दूरियाँ भी इनके दिलो को दूर रखने मे कम पड़ जाती है ओर वही दूसरी तरफ जब में हमारा घर देखता हू तो बहुत दुख होता है, हम पास रहकर भी बहुत ज़्यादा दूर है. ऐसी दूरिया जो मिटाए नही मिटती. आज हम बस लोगो को ये दिखाने मे लगे रहते है की हम एक परिवार की तरह है. सच पूछे तो हमारे घर मे आज प्यार जैसी कोई बात रही ही नही है बस रिश्तो मे दिखावट ही दिखती है.हम बस लोगो को मूर्ख बनाने मे लगे हुए है की हमारे जैसा सयुक्त परिवार पूरे भीनमाल मे कही है ही नही. मुझे लगता है सच मे हमारे जैसा मूर्ख परिवार पूरे भीनमाल क्या पूरी दुनिया मे कही मिलेगा ही नही जो झूठे दिखावे करके अपने आपको ही मूर्ख बनाते है. में इनका बहुत शुक्रगुज़ार हू की इन्होने मुझे अपने समारोह मे आमंत्रित नही किया,अच्छा है की इन्होने इस बात को समझ लिया है की इनकी दुनिया और मेरी दुनिया अलग-अलग है, इनकी दुनिया मे मासूम लोगो को नीचे गिराया जाता है,आम लोगो मे नफ़रत बाटी जाती है ओर इनका यही नारा है की ना खुद चैन से जियो ना दूसरो को चैन से जीने दो. मेरी दुनिया छोटी ओर इनसे एकदम अलग है,मेरी दुनिया प्यार की दुनिया है जहा लोगो मे प्यार बाटा जाता है,जहा सब लोगो को आदर ओर सम्मान की द्रष्टि से देखा जाता है,मेरी दुनिया अमन ओर शांति की दुनिया है.दिल के सच्चे लोगो का सबसे बड़ा धन उनका आत्मसम्मान होता है,मेरे पास भी आज आत्मसम्मान के अलावा ओर कुछ नही है,में उसे नही खोना चाहता. अगर ये इनके समारोह मे बुलाए तो भी में उन लोगो के पास नही जाना चाहता जो लोगो से नफ़रत करना जानते हो, ग़रीब ओर मासूम लोगो को अपमानित करना जानते हो, अबला नारियो पर ज़ुल्म करना जानते हो, गुंडागर्दि कर आम लोगो को धमकाना जानते हो, अपने भीनमाल जैन समाज के लोगो को ही लूटना जानते हो, भोले भाले लोगो को बाटली मे उतारकर मूर्ख बनाना जानते हो. में ऐसी सोच ओर ऐसी सोच रखने वाले लोगो का और उनके समारोहो का पूरी तरह से बहिष्कार करता हू. मुझे ऐसी जगह नही जाना जहा जाके मेरी अंतरात्मा ही मुझे धीतकारने लगे,मुझे मेरी अंतरात्मा ही कोसने लगे.अक्सर में ये महसूस करता हू की में कैसे अलग किस्म के लोगो के बीच हूँ फिर ये सोचता हूँ की कुदरत का यही दस्तूर है की जहा कोयले की ख़ान हो वही कोहिनूर हीरा निकलता है,कीचड़ मे ही कमल खिलता है,हीरण्यकश्यप जैसे राक्षसी घर मे ही प्रहलाद जैसा भक्त पैदा होते है वैसेही मूर्ख लोगो के घर मे ही विद्वान और आम लोगो का सुभचिंतक पैदा होता है.ये हमेशा मेरे खिलाफ जमकर दुष्प्रचार करते है. सच कहु तो में एक छोटा सा प्यारा सा 28 साल का मासूम बच्चा हूँ, में अपनी छोटी-छोटी, नन्ही-नन्ही आखों से बड़े-बड़े सपने देखता हूँ.में कभी अपने लिए सपने नही देखता में अपने देश, अपने समाज, अपने परिवार के लिए हसीन सपने देखता हूँ. में चाहता हू भारत का नाम दुनिया मे सबसे उपर हो. में चाहता हू समाज मे लोग नफ़रत बाटने की बजाय प्यार बाँटे.समाज मे लोग पैसो की जगह आदर्शो को तरहीज दे.समाज मे रिश्ते दिखावटी होने की बजाय फोलाद की तरह मजबूत हो.समाज मे लोग धर्म का सही मतलब समझे,धर्म के नाम पर आडंबर ना हो बल्कि समाज के आम लोगो की सच्ची समाज सेवा हो. में बहुत सारे पैसे अपने परिवार के लिए जोड़ना चाहता हूँ, मेने इस दुनिया का एक बुरा चेहरा भी देखा है, मेने देखा है की कैसे पैसो की ताक़त पे रिश्ते नाते बदल जाते है. में पैसा जोड़ना चाहता हू ताकि मेरा परिवार कभी पैसो के लिए परेशान ना हो.में अपने परिवार को दुनिया भर की खुशिया देना चाहता हूँ. में समाज और अपने देश के लोगो को हमेशा खुश देखना चाहता हू. इतनी महान सोच होते हुए भी हमारे शूरवीर, लोगो मे मुझे ग़लत तरीके से पेश करने की कोशिश करते है.यहाँ महाभारत कालीन समय से भी गहरे षड्यंत्र रचे जाते है. हमारे परिवार मे लगभग सब अंधे हो गये है कोई पैसो की ताक़त मे अंधे हो गये है तो कोई अपने बेटे ओर अपने भाई के प्यार मे अंधे हो गये ओर कोई आँखे होने के बाद भी आँख खोलना ही नही चाहता. हमारे घर के लोग अंधे,गुंगे और बहरे हो गये है जिनको सच्चे लोगो की पुकार सुनाई ही नही देती. मुझे तो पागल बताके इन्होने जैसे एक ऐसे 100 फीट के अंधेरे कुए मे फेक दिया है जहा से मे आवाज़ लगाऊ तो कोई सुननेवाला ही नही है. बस मुझे मेरे उपर नीला आसमान दिखता है,में उस आसमान मे उड़ना चाहता हू. में अगर इस गुमनामी के गहरे अंधेरे कुए से जब भी बाहर निकल कर आसमान मे उड़ने की कोशिश करता हू तो ये मुझे वापस ज़ोर से धक्का देकर नीचे गिरा देते है. इनको ये बिल्कुल अच्छा नही लगता की भीनमाल जैसे छोटे गाँव मे रहा ओर पढ़ा हुआ बच्चा हमारी बराबरी करना चाहता है. अक्सर हमारे घर के ताकतवर लोग मेरी छवि ग़लत पेश करने की कोशिश करते है. ये अपने पैसो की ताक़त,अपने उँचे रूतबे,उँचे अहोदे का हमेशा आम लोगो पर ग़लत इस्तेमाल करते है. यहा पैसो की चकाचोंध इतनी फैली हुई है की लोगो को सच्चाई दिखती ही नही. बस यहा पैसेवाले लोगो की जय जयकार होती है. इस उल्टी दुनिया मे सच्चे का मुँह काला और झूठे का बोल बाला है. अमीर यहा जो कहे चाहे वो सच्चा हो या जूठा, पत्थर की लकीर बन जाती है. अक्सर जो लोगो को पर्दे पे दिखता है वो हक़ीक़त नही होता. पर्दे पर अपने आप को बहुत बड़ा महात्मा और साधु दिखाने वाला इंसान पर्दे के पीछे शैतान हो सकते है ओर पर्दे पर एक पागल दिखनेवाला इंसान वास्तव मे बहुत बड़ा विद्वान ओर ज्ञानी हो सकता है. मेरे पापा ने मा-बाप के ऐक इशारे पर भगवान राम की तरह घर बार छोड़ दिया था पर अफ़सोस उनके भाई भरत जैसे भाई नही हो पाए. आज तो ये रावण जैसे अहंकारी हो गये है. मेरे पापा के गुजर जाने के बाद हमारा बहुत तिरस्कार हुआ है. मेरे पापा ने इनके लिए जो कुर्बनिया दी,वो सब ये भूल गये. पापा ने जिन लोगो के लिए सब कुछ त्याग दिया, आज उन लोगो ने उनके बच्चो के लिए क्या किया? आज हमे तो तिरस्कार भरी जिंदगी मिली. हमे ये लोग वो सम्मान दिला ही नही पाए जिसके हम सच्चे हकदार थे. सम्मान तो छोड़ो आज ये लोगो मे मुझे पागल ओर कपटी दिखाने मे लगे रहते है. हर बार मुझे पागल होने का सर्टिफिकेट दिया जाता है. हमे ये अपने पैरो के नीचे रखना चाहते है. हमे आम लोगो मे नीचे गिराने मे कोई कसर नही छोड़ी जाती. हमे नीचे गिराना ज़रूरी है क्यूकी इनको उपर जो उठना है. में इनकी सच्चे दिल से निकलने वाली मुस्कुराहट के लिए तरस गया लेकिन आज तक मेरे लिए ऐसी एक मुस्कुराहट तक नही दिखी. में बचपन से महान हस्तियो की जीवनियाँ पढ़कर बड़ा हुआ हू.मेरे आदर्श महात्मा गाँधी,भगत सिंघ,नेल्सन मंडेला,राजा राममोहनराय,मदर टेरेसा,श्रवण कुमार,गौतम बुद्ध,भगवान महावीर स्वामी जैसे बहुत सारे महान लोग रहे है.मुझे हमारे घर के लोगो को देख कर हमेशा दुख होता है की आख़िर हमारी सोच इतनी छोटी कैसे है? हमारे शूरवीर अपने आदर्शो को भूल कर इतने बड़े दरिंदे कैसे हो गये है? कुछ लोग कहते है की मुझे आम लोगो मे अपने परिवार ओर अपने समाज की बुराई नही करनी चाहिए पर यहा मेरा सुननेवाला कौन है, मुझे तो इन्होने पागल घोषित करके एक तरफ कर दिया है. मुझे लगता है की हर परिवार और समाज मे कुछ अच्छाई तो कुछ बुराई होती है हमे अपने समाज की बुराई को जड़ से मिटाने की कोशिश करनी चाहिए ओर अगर अपने परिवार ओर अपने समाज के बारे मे में या आप बात नही करेंगे तो कौन करेगा. क्या अमेरिका से बराक ओबामा या न्यू दिल्ली से मनमोहन सिंग आके हमारे घर ओर हमारे समाज के बारे मे अपनी राय रखेंगे. अगर हमे हमारे घर और हमारे समाज को बदलना है ओर उसे एक नई दिशा मे ले जाना है तो हमे ही कुछ करना होगा. हमे ही समाज की बुराई के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी और लोगो को जागरूक करना होगा. में चाहता हूँ जिस तरह वाल्मीकि डाकू से साधु बन गया उसी तरह हमारे लोगो को भी बुराई छोड़ कर अच्छे आचरण का दामन थामना होगा. हमे अपने आप को नेक रास्ते पर चलाना होगा.हमारे मुखिया के भाई और उनके बेटे जो अपने आपको घर का भावी लीडर बताते है इस तरह से “अनरिस्पोन्सिब्ल बिहेवियर” ना रखे.अगर घर के लीडर ही आम लोगो से ऐसा व्यवहार रखेंगे तो कैसे चलेगा? हमारा नाम कैसे रोशन होगा? हमे लोगो मे नफ़रत बाटने की जगह प्यार बाटना होगा. हमारे पूर्वज जिन्होने इस घर को अपने खून पसीने से सिंचा है वो हमारे विचार देख कर आहत हो रहे होंगे. हमे शांति,प्यार ओर बुद्धिजीवियो के बताए हुए मार्ग पर चलना होगा. में समाज के बुद्धिजीवियो से नम्र निवेदन करना चाहूँगा की वो इस लेख को पढ़कर कृपा कर शांति से 2 मिनिट का मोनव्रत धारण करे ओर ऊपर वाले से ये प्रार्थना करे की हमारे परिवार के मूर्ख लोगो को थोड़ी सद्बुद्धि प्रदान करे ताकि वो अंधकार का रास्ता त्याग कर उजाले का रास्ता चुने. धन्यवाद.

Incredible India.. Where a girl is neither safe inside a womb, nor outside it


Incredible India.. Where a girl is neither safe inside a womb, nor outside it
Salute to the brave lady of India. Today I am feeling very shameful to being a part in a male dominant society. Most men in India disrespect women. Woman never gets a higher place in our society, every time females suppressed by the devil philosophy. Woman is another name of sacrifice. The brave lady didn’t fight for herself but she fight for every women in India. She did fight against the people who think woman as an object. But disappointingly she lost her battle in male dominant society. Is this India? Instead of rise voice to punish criminals some people start arguing about woman freedom that they must not come out from house at night or not wear western outfits. Shameful thought of shameful people. Is it crime in India to be a woman? What did woman wrong that male dominant society want to snatch all rights from her? It is the worst day for male dominant society. For protest I am changing my facebook image to a black doted image. Great honor to young brave lady.
She didn't die of a 'multi organ failure' but by a 'MultiSystemFai­lure'
If the girl was sent to Singapore for 'better' treatment, the rapists should be sent to Saudi for better justice
No need for tear gas today, Delhi Police. We have enough tears in our eyes already. Pls let us mourn in peace.
 Might be our education system is making good engineers, good doctors BUT need for good human being is required most.

Monday, 10 September 2012

Shameful news for Indian Democracy. Aseem Trivedi arrest for drawing cartoons against corruption.


 Unfortunate & shameful things are happening in Indian democracy, Indian government giving “Biryani” to Pakistani terrorist “Ajmal Kasab” & sending jail to Indian people who is fighting for India. Shameful act by Mumbai police, a politician who delivers always hatred speech & try to divide Indian people, they admire him & other hand slapping charges of Prevention of Insults of National Honour Act, 1971 on cartoonist Aseem Trivedi. It is true that some cartoons are objectionable but police must not react in this manner. It is totally biased retaliation. I & I think everyone against cartoonist Aseem Trivedi’s arrest. It is attack on freedom of expression right; it is against Indian democracy. Indian politicians are “playing” with Indian laws. Indian government Pakistani terrorists ko “biryani” khilati hai or Indian public ko “lathiya” khilati hai. Shameful, shameful, shameful… We must raise our voice against injustice. Jai Hind.

Saturday, 18 August 2012

Indian Politicians want to ban on social networking sites like Facebook & twitter.


Hey! A strange & dishonest remark on social networking sites by some of our Indian politicians. Mr. Ramgopal Yadav from SP suggest in parliament that we must ban on social networking sites like facebook & twitter because it spreading rumor 
about “Assam riot”. It is totally intolerable to blame on facebook & twitter. I think rumors never spread by social networking sites because mostly educated people surf on internet & they never believe & support senseless, baseless rumors. Spreading rumors is uneducated morons’ occupation. If you remember a biggest rumor spread that Ganpati’s idol drinking milk on 1995. People waste about million litters of milk, no social networking sites ever come in origin till 1995. I think Social networking sites are not working as a rumor spreading machine but it is a medium to express common man feelings on currant event. Many politicians are frustrated by social networking sites because first time ever all religion, all caste and all state people come in one roof to fight against corruption. Internet gives a new definition on freedom of common man. If our government ever considers banning on social networking sites, we must unite & protest against their decision. They will go further if we not stop them now. Most parliamentary members are involve in big scams, what will happen if Indian public question that most scams happen by members of parliament so ban the parliament to save India. I think as a parliament is necessary to advance the India same as social networking sites are necessary to express public opinion. Social networking sites are real strength of common public, banning on the social sites is like banning on “freedom of expression” right. Whatever religion of anyone, all the Indians are one. Indian enemies are trying to divide all Indians but they will never succeed in their operation. “kitne baaju kitne sar ginle dushman dhyaan se haarega woh har baazi jab khelein ham jee-jaan se”. Jai Hind.

Wednesday, 15 August 2012

"HAPPY INDEPENDANCE DAY"? WHY???..

Whenever anyone greet on 15 August “Happy independence day”; a pain burst out in my heart. Did we really get freedom? If you are celebrity or belong to rich family, it is fine but if you are common man then it is “Unhappy Independence Day” 
for you. I think a common man did not get freedom. “PAHLE ANGREJ RAJ THA AB JUNGLE RAJ HAI”. We waste our freedom fighters sacrifice. They did not fight & sacrifices their life for today scenario but they fight to dream that our next generation will get justice which they didn’t get. If you are celebrity or your father have money power you can do anything whatever you want, in India you can never get justice but you have to buy justice. Neither anna hazare,baba ramdev nor any politician or political party can change our India. Only we “a common man” can change India. I like this “Rang De Basanati” movie last scene very much, listen music at 1.14, it is heart touching & dialogue "Zindagi jeene ke do hi tarike hote hain. Ek joh ho raha hai hone do. Bardast karte raho. Ya phir zimedari uthao usse badalne ki. Koi desh perfect nahi hota,use perfect banana padta hai" read one hindi article also here- http://hindi.in.com/latest-news/news/An-Open-Letter-To-Common-Men-Of-India-On-Independence-Day-1471752.html