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Tuesday, 21 May 2013

TRUTH BEHIND LBT AGITATION IN MAHARASHTRA, MAHARASHTRA ME LBT ANDOLAN KA KALA SACH, महाराष्ट्र के एल.बी.टी आंदोलन का काला सच

महाराष्ट्र के एल.बी.टी आंदोलन का काला सच- क्या गेम खेला कॉंग्रेस सरकार ने, पूरा मैच ही फिक्स कर डाला हमारे शरद पवार साहब ने. आज पहली बार मुझे ये अहसास हुआ है की एक आम इंसान की इस देश मे क्या हेसियत है. मैने हर दरवाजे पर आवाज़ लगाई चाहे वो नॅशनल मीडीया हो, ओपोजीसन पार्टी हो, मिनिस्ट्री हो या ब्यूरक्रॅट्स हो. एक बात आज अच्छी तरह से समझ मे आ गयी की ये देश डेमॉक्रेटिक देश नही है पर डेमॉक्रेटिक होने के नाम पर एक बहुत बड़ा धब्बा है. यहा जिस तरह ईमान बिकता है उसपर शायद इंसानियत भी शर्मसार हो जाए. यहा मरता हमेशा आम इंसान ही है. आम छोटे-छोटे ट्रेडर्स को 30 दिन बंद करके क्या मिला? हिन्दी मे एक कहावत है की- माल खाए मदारी ओर मार खाए बंदरिया . छोटे व्यापारी एक महीने की हड़ताल रख कर बंद करते है फिर सरकार की तरफ से एक रेप्रेज़ेंटेटिव आता है वो उनके लीडर को अलग कमरे मे ले जाकर गुप्त बाते करता है फिर बाद मे ये फेसला लिया जाता है की सरकार मान नही रही हम 1-2 माँग कम करके समझोता कर देते है. आंदोलन की जो खास बात होती है उसको नही माना जाता पर जो छोटी छोटी बात होती है उनको मान लिया जाता है बाद मे मीडीया मे दिखाया जाता है की सरकार ने व्यापारियो की लगभग सभी बाते मान ली है ओर व्यापारियो की जीत हुई है वास्तविकता क्या है इसे पूरी तरह से छुपाया जाता है. आम लोगो को इससे मतलब नही है की वास्तविकता क्या है बस टीवी पे न्यूज़ चेनल ने दिखा दिया हम जीत गये तो बस हम जीत गये ज़्यादा डीप मे जाने की ज़रूरत नही है. आम लोग दिमाक का ज़्यादा इस्तेमाल करने मे यकीन नही करते बिचारे क्या करे इनको सरकार ने इतना उलझा के रखा है की इनको घर,दफ़्तर ओर अपना छोटा परिवार इससे ज़्यादा सोचने की फ़ुर्सत ही नही है. देश की कौन सोचे उसे सोचने के लिए तो हमारे पॉलिटिशियन्स और हमारी मीडीया है ना हम तो बस बॉलीवुड के हीरो ओर हीरोइन के बारे मे सोचेंगे की वो कैसे नाचते है ओर क्या पहनते है. अक्सर छोटे व्यापारियो ओर ट्रेडर्स के कंधो पर बंदूक रखकर बहुत बड़ा गेम खेला जाता है.यही इस देश की परंपरा है,यही इस देश की डर्ट्री पॉलिटिक्स है. और वाह रे आम जनता वो तो 10 रूपये का टूतपेस्ट भी 100 रुपये मे लेकर के आती है क्यू की वो टीवी पर देखती है की कैसे उसको दातो पर लगाने पर दात चमकने लगते है ओर लड़किया पीछे पड़ जाती है. कभी कभी हँसी आती है तो कभी कभी बहुत दुख होता है की क्या हमारे देश की जनता को मूरख बनाना इतना आसान है? वैसे तो इस देश की जनता एक एक रुपये मे कंजूसी करती है पर 5 रुपये के नींबू पानी की जगह 50 रुपये का लेमन फ्लेवर का कोल्ड ड्रिंक पीने को ज़्यादा पसंद करती है क्यूकी उसने वो टीवी पर देखा है की कैसे कोल्ड ड्रिंक पीकर हीरो एकदम तूफ़ानी बन जाता है. सच देखे तो जितना 5 रुपये का नींबू पानी हेल्दि होता है उतना कोल्ड ड्रिंक भी नही होता वो तो उल्टा नुकसान करता है पर क्या करे हमने टीवी पर देखा  है ओर टीवी पर ग़लत थोड़े ही बताते है. मीडीया मे अक्सर खबर देख कर झट से हम यकीन कर देते है की ये तो महान इंसान है, ये तो देश के भले के लिए सोचता है पर सच्चाई तो कुछ ओर ही होती है वो तो पैसा फेक कर मीडीया मे अपनी तारीफे करवाता है. जो बिचारे सही लोग है वो तो आगे ही नही आ पाते क्यूकी उनके पास तो करप्ट पॉलिटीशियन जीतने पैसे ही नही है,उसने तो जिंदगी भर लोगो की सेवा ही की है इसलिए बिचारे को पैसा इक्कठ्ता करने का मौका ही नही मिल पाया.मौका मिला तो भी उसे सही तरीके से भूना नही पाया क्यूकी उसके लिए तो देश ही सर्वोप्रिय था. आज टीवी पर, मीडीया मे जो भी नेता दिखता है कोई ईमानदार नही है,अगर ईमानदार होता तो वो टीवी पर आ ही नही पाता. टीवी पर ओर मीडीया मे आने के लिए भी इनको करोड़ो अरबो रुपये की बोली लगानी पड़ती है तब कही जाके हमारी ईमानदार मीडीया उसकी तारीफ करती है. हम इस देश मे बस कीड़े मकोड़ो की तरह है. जिस तरह हमारे घर मे कीड़े मकोडे बढ़ जाए तो हम उसकी सफाई करते है, हमारी सरकार को लगता है की आम लोग भी कीड़े मकोड़ो की तरह बहुत बढ़ गये है चलो आज घर को सॉफ किया जाए. फिर ऐसे नियम बनाए जाते है जिससे छोटे-छोटे आम लोगो के धंधे बंद हो जाए ओर उनके पास बचे हुए माल को भी लूट लिया जाए,क्योकि उसके साथ तो कोई हे ही नही. जिस तरह से हम घरो मे मच्छरो को मारने के लिए स्प्रे का यूज करते है वैसे ही ये नये नियम बनाकर उसे स्प्रे की तरह यूज करते है. ये हम जैसे छोटे छोटे ट्रेडर को आम लोगो मे ये दिखाना चाहते है की हम जन विरोधी है, लोगो को परेशान करने मे हमे मज़ा आता है, मीडीया भी सरकार के सुर मे सुर मिलकर लोगो मे ये दिखाने की कोशिश करती है की आम ट्रेडर चोर है, इसको टेक्स नही भरना है, ये सरकार की शराफ़त का ग़लत फ़ायदा उठाते है ओर हड़ताल कर आम लोगो को परेशन करते है. आम लोग इस बात पर यकीन कर हमे गालिया देते है हमे कोसने लगते है, सचाई क्या है ये आम लोगो को भी नही पता पर टीवी पे देखा है, मीडीया ने दिखाया है तो सच ही होगा. आम लोगो से एक छोटा सवाल- हमारी सरकार ने जो नये नियम बनाए है उसके खिलाफ कोई बड़ा शॉपिंग माल या कोई मल्टिनॅशनल कंपनी ने तो हड़ताल नही की फिर आम छोटे-छोटे ट्रेडर्स ने क्यू हड़ताल की? 150000 लोगो पर लाठी चार्ज होता है ओर लगभग 31000 ट्रेडर्स को जैल मे डाला जाता है मीडीया वो नही दिखाती ओर संजय दत्त जैल जा रहा है उसपर पूरे दिन आसू बहाती है, मीडीया भी क्या करे बिचारी उसने भी पैसा खाया है सरकार से एलबीटी आंदोलन पर न्यूज़ नही बताने का. वास्तविकता आम लोगो से छुपा दी जाती है पर वास्तविकता ये है की आम लोग नही जानते की वो ओर हम सब एक ही नाव मे सवार है, अगर हम डूबेंगे तो सब साथ मे डूबेंगे. हम ओर तुम दोनो एक ही है बस यहा तो गेम खेला जा रहा है की फूट डालो ओर राज करो. सरकार अपने प्यादो का बड़ी अच्छी तरह से इस्तेमाल करती है आम लोगो पर की आम लोगो को आम लोग ही दुश्मन नज़र आने लगते है. एलबीटी ओर ओकटरोई पूरे भारत मे कही नही है ये सिर्फ़ महाराष्ट्रा मे ही लगाया गया है,सिर्फ़ महाराष्ट्रा मे क्यू लगाई गयी है, पता नही? सरकार को पैसा चाहिए इस लिए लगा दी डेवेलपमेंट का बहाना करके. सरकार लोगो मे ये बताने की कोशिश करती है की छोटे छोटे आम व्यापारी बहुत बड़े चोर है,बड़े बड़े घोटाले करते है,इनको टेक्स नही भरना,हमने क़ानून लाया है उससे ज़्यादा ट्रॅन्स्परेन्सी आएगी. सच क्या है वो आम जनता को भी पता नही. एक मज़े की बात बताता हू सरकार जब भी टेक्स लाती है उसका तोड़ भी सरकारी बाबू ही देते है वोहि व्यापारियो को ग़लत रास्ता बताते है की आप मेरी थोड़ी जेब गरम करो और आप ऐसे नही वैसे करो ताकि आपको इतना पैसा देना नही पड़ेगा. हमारा टेक्स सिस्टम उपर से नीचे तक भ्रस्त हो चुका है,यहा नियम ट्रॅन्स्परेन्सी के लिए नही ज़्यादा जेब गरम करने के लिए बनता है. दूसरे तरक्कीशील देश जैसे सिंगापुर मे आप देखो तो वहा सिर्फ़ एक टेक्स जीएसटी ही है वो भी सिर्फ़ 7% ओर विदेशी लोग अगर वहा खरीदी करे तो उनके लिए 2% ही है,उन्हे एयरपोर्ट पर रिफंड दिया जाता है. हमारे देश मे सरकार जानबुझ कर ज़्यादा टेक्स रखती है ताकि कोई इंसान ईमानदारी से टेक्स ना भर सके ओर नेताओ से लेकर उनके चम्चे ओर सरकारी बाबुओ तक की जेबे गरम होती रहे. वो आम हिन्दुस्तानी को ईमानदार नही बेईमान बनाना चाहते है. इतिहास गवाह है की आम इंसान कभी आज़ादी की सांस ही नही ले पाया,वो हमेशा घुट घुट के मरा है. पहले वो निर्दय राजाओ के अधीन था फिर मुगलो के बाद मे अंग्रेज़ो के ओर अभी नेताओ के. इस देश मे आम इंसान अपना दिमाक नही चला सकता है अगर नेता कहे दुकान बंद करो तो दुकान बंद करनी पड़ेगी अगर उसने कहा खोलो तो खोलनी पड़ेगी वो कहेंगे तुम हिंदू हो मुसलमानो से नफ़रत करो ओर मुसलमानो से कहेंगे तुम हिन्दुओ से नफ़रत करो तो आम लोगो को वो करना ही पड़ेगा, नही तो चैन से जीने नही दिया जाएगा. इस देश की राजनीति हमेशा से फुट डालो और राज करो पर ही आश्रित रही है. ये है हमारा भारत ओर इसको हम कहते है डेमॉक्रेसी. वेल डन. शाबाश मेरे देश के नेताओ ओर शाबाश मेरे देश की बिकी हुई मीडीया. जय हिंद.


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