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Saturday, 20 February 2016

Nationalism Explanation by "NDTV" and its News Anchor Mr. "Ravish Kumar" (NDTV का राष्ट्रवाद)

जो बुद्धिजीवी लोग NDTV की खबरों को देख कर असमंजस मे पड़ गए है की "राष्ट्रभक्ति" किसे कहते है वो इस वीडियो को जरूर देखे की कैसे कुछ पत्रकार, नेता और बुद्धिजीवी लोग इस बात पर भी आपत्ति जता रहे है और सवाल पूछ रहे है की देश की यूनिवर्सिटीज मे तिरंगा झंडा फहराना क्यों जरुरी किया जाए? उनके हिसाब से भारत की शान का प्रतिक "तिरंगा झंडा" फहराना भी एक तरीके का "अति राष्ट्रवाद" है और वो आम लोगो मै नहीं होना चाहिए. बहुत अफसोस होता है देश के इन पढ़े लिखे बुद्धिजीवियों पर और इनकी सोच पर और "राष्ट्रवाद" की इनकी बनाई हुई अपनी परिभाषा पर.  इनको देख कर ऐसा प्रतीत होता है या तो ये देश के गद्दारो की भाषा बोल रहे है या तो ये अपने आपको एक ऐसा बुद्धिजीवी इंसान बताने की चाहत रखते है जो आम लोगो से अलग सोचता है जिसे ये बुद्धजीवी  लोग कहते है "OUT OF THE BOX THINKING".देश के एक गरीब ठेले वाले को भी समझ होती है की देश के खिलाफ "हिंदुस्तान मुर्दाबाद","भारत के टुकड़े होंगे हजार" और "अफजल हम शर्मिंदा है तेरे कातिल जिन्दा है" नारे लगाने वाले देशद्रोही होते है पर अफ़सोस कितनी बड़ी विडम्बना है की "आउट ऑफ़ द बॉक्स थिंकिंग थ्योरी" रखने वाले इन बुद्धि जीवी लोगो को इस पर भी आत्ममंथन और विचार करना पड़ता है की ऐसे लोगो को देश विरोधी तत्व कहा जाए या नहीं. कुछ न्यूज़ चैनल्स जो नारो का वीडियो चलाया जा रहा है उसपे शक कर रहे है की हो सकता है इन कुछ विडोयोज के साथ छेड़ छाड़ हुई हो. चलो एक बार मान भी लिया जाए की विडोयोज से छेद-छाड़ की गयी हो पर जब वो ही लोग न्यूज़ डिबेट मै आकर भी वो ही भाषा बोल रहे है की "कश्मीर को आज़ाद करो" और "आतंकवादियों का समर्थन" कर रहे हो तो एक बड़ा सवाल ये उठता है की फिर इन्हे क्यों गलत ना माना जाए और क्यों इनको देशद्रोहियो के कटघरे में खड़ा ना किया जाए? NDTV के सवांददाता जिस तरीके का "राष्ट्रवाद" लोगो को चुनने की सलाह दे रहे है अगर उसपे पूरा हिंदुस्तान अमल करने लगेगा तो आप सोचिये इस देश का क्या हाल होगा.
NDTV के "राष्ट्रवाद'" को समझकर कोई देश की फौज मै भर्ती ही नहीं होगा, क्यों की NDTV के "राष्ट्रवाद" के पैमाने से देश क्या है? कुछ भी नहीं है. कोई भी इंसान भारत की सीमाओ की दुश्मनो से रक्षा क्यों करे और क्यों अपने प्राणो की आहुति दे? उसे तो अपने घर परिवार के साथ रह कर ही कुछ काम धंधा करना चाहिए, वो देश के आम लोगो के लिए अपनी जान क्यों दे जबकि वो अपने परिवार के अलावा बाकी लोगो को जानता ही नहीं. लोग मरे तो मरे उसका क्या. NDTV के "राष्ट्रवाद" के पैमाने से ना कोई आर्मी ज्वाइन करेगा ना कोई पुलिस बनकर आम लोगो को हत्यारों और चोर उच्चको से बचाने की कोशिश करेगा. वो आम लोगो को बचाने का खतरा क्यों मोल ले. फिर ना तो कोई हनुमनथप्पा होगा न संदीप उन्नीकृष्णन होगा और ना कोई तुकाराम ओम्ब्ले होगा, सबको अपनी जान प्यारी है भाई, अपनी जान देश के लिए क्यों दे. अगर पाकिस्तान से कसाब आकर खुलेआम लोगो को AK-47 लेकर मार रहा है तो मारने दो भैया, चीन,पाकिस्तान मिलके देश पर हमला करे तो करने दो,हमें क्या? जब हमारे ऊपर हमला करेगा तो ही हम कुछ करेंगे. NDTV की राष्टृवाद परिभाषा मान कर इस देश मे ना कभी भगत सिंह पैदा हो पायेगा और न ही कोई महात्मा ग़ांधी बन पायेगा. एक सच्चाई ये भी है की अगर आम लोगो मै सच्चा राष्ट्रवाद न पनपा होता तो शायद इस देश को आजादी मिलना भी नामुमकिन था और वो राष्ट्रवाद इन बुद्धिजीवी NDTV के संपादको की परिभाषा से काफी हद तक विपरीत है. NDTV आम लोगो को यही राष्ट्रवाद समझाना चाहता है. जो राष्ट्रवाद नहीं एक तरीके का सेल्फवाद और मूर्खवाद है. अभी तो ऐसा प्रतीत होता है की ये आम लोगो को गुमराह करने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. जो लोग पहले चुप रह कर इन देश विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे थे वो आज अपने पुरे दल-बल से बिल से बाहर निकल चुके है और लोगो को एक ऐसी समझ दे रहे है जो वाकई एक अखंड देश के लिए बेहद खतरनाक है. अगर इनकी मानसिकता लोगो मै बैठ गयी तो सचमुच देश के टुकड़े होते टाइम नहीं लगेगा और उसी दिशा मे इन्होने बड़ा कदम उठा दिया है, जो पहले काम गुपचुप तरीके से हो रहा था वो आज खुलेआम खुल्लम-खुल्ला हो रहा है और इसके लिए वो कुछ ख़ास समुदाय को अपने पक्ष मै करके इस प्लान को अंजाम दे रहे है. आज सोचने का समय उस धार्मिक समुदाय के लिए भी है जो इनके मायाजाल मे फंस चुके है. आप तय कीजिये की इस भारत देश को तोड़कर क्या आप पाकिस्तान और ISIS जैसे संघटन के साथ मिलकर खुश रह पाएंगे? याद रखिये भारत देश ही आपका अंतिम और आखरी सहारा है, अगर इसकी बर्बादी करने वाले लोगो मै आप शामिल हो गए तो आपका भविष्य बिलकुल भी सुरक्षित नहीं रहेगा. सब साथ है तो ये देश है अगर अलग हो गए तो कुछ भी नहीं और ये देश विरोधी ताकते ये ही चाहती है आप खुद तय कर लीजिये की आपको इन देश के गद्दारो और लोगो को गुमराह करनेवाले और अपने आप को आम लोगो का हितेषी बताने वाले मीडिया जैसे NDTV के एंकर रविश कुमार की बातो मै आना है, या उन देश विभाजक ताकतों का विरोध करना है. सोचते समय जरा ध्यान रखना इन बिकाऊ मीडिया लोगो के सम्बन्ध उन लोगो से है जो खुल्ले आम देश के खिलाफ नारा लगाते है की 'भूका नंगा हिंदुस्तान, जान से प्यारा पाकिस्तान". आप तय कर लीजिये आप को क्या चुनना है. जय हिन्द. (Arundhati Roy is a cousin of prominent media personality Prannoy Roy, the head of the leading Indian TV media group NDTV. Ye Arundhati Roy wahi hai jisne naare lagaye the "BHOOKA NANGA HINDUSTAN, JAAN SE PYARA PAKISTAN").